इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल ने शनिवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने उन सभी वादों को पूरा करने में विफल रहे हैं जो उन्होंने 2014 के लोकसभा चुनावों के पहले किए थे.
गुजरात के साबरकांठा में एक रैली को संबोधित करते हुए पटेल ने कहा, "जब आप झूठे वादे करके और झूठ फैलाकर 2014 में सत्ता में आए तो आपने नहीं सोचा होगा कि आप केवल चार साल में अलोकप्रिय हो जाएंगे. लोगों का अब बीजेपी से मोहभंग हो गया है. इसलिए कांग्रेस तीन राज्यों में विधानसभा चुनाव जीती."
पटेल ने कहा, "जब 2014 में आप सत्ता में आए तो आपने सोचा कि आप हमेशा शासन करेंगे. यह आपका घमंड था. आपने यह एहसास नहीं किया कि अगर जनता आपको सत्ता में ला सकती है तो वह आपको बाहर भी कर सकती है."
मोदी पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा, "आप (मोदी) केवल 'नेहरू जैकेट' पहनने से जवाहर लाल नेहरू नहीं बन सकते. इसी तरह आप विदेशी दौरों पर जाकर इंदिरा गांधी भी नहीं बन सकते. आप डिजाइनर जैकेट और कुर्ते पहनने से राजीव गांधी नहीं बन सकते. ऐसे नेताओं की जमात में शामिल होने के लिए, आपको उनकी तरह त्याग करना होता है. क्या आपमें ऐसा करने का साहस है?"
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक सांसद और कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा है कि उनकी पार्टी मौजूदा स्वरूप में तीन तलाक़ विधेयक को राज्यसभा में पास नहीं होने देगी. उन्होंने कहा कि इसके लिए उन सभी दलों का साथ लिया जाएगा जिनके साथ मिलाकर इस विधेयक को गिराया जा सके.
उन्होंने कहा कि लोकसभा में जब यह विधेयक पेश किया गया, तब 10 विपक्षी पार्टियां खुलकर एकसाथ आई थीं. यहाँ तक कि कई मुद्दों पर सरकार का समर्थन करने वाली अन्नाद्रमुक और तृणमूल कांग्रेस ने भी इसका विरोध किया था.
लोकसभा ने गुरुवार को मुस्लिम महिला (विवाह संरक्षण अधिकार) विधेयक 2018 को मंज़ूरी दे दी थी. इस विधेयक के अगले हफ्ते राज्यसभा में पेश होने की उम्मीद है.
टाइम्स ऑफ़ इंडिया के मुताबिक पाकिस्तान ने करतारपुर कॉरिडोर में आने वाले भारतीय तीर्थयात्रियों के लिए 14 सिफारिशें की हैं.
पिछले महीने भारत और पाकिस्तान की सरकारों ने इस कॉरिडोर के अपने-अपने क्षेत्र में निर्माण की आधारशिला रखी थी. सिफ़ारिशों के तहत ग्रुप में कम-से-कम 15 श्रद्धालु हों, उन्हें अपने पास वैध पासपोर्ट, प्रासंगिक सुरक्षा निकासी दस्तावेज रखने होगा. साथ ही भारत को तीर्थयात्रियों के आने की सूचना तीन दिन पहले देनी होगी.
परमिट सिर्फ़ करतारपुर की यात्रा के लिए जारी किया जाएगा. एक दिन में 500 से अधिक तीर्थयात्रियों को परमिट नहीं दिया जाएगा. साथ ही करतारपुर गलियारा सुबह 8 से शाम 5 बजे तक खुला रहेगा.
टाइम्स ऑफ़ इंडिया के मुताबिक महाराष्ट्र सरकार ने आदेश जारी कर मुंबई में 31 दिसंबर की रात को पब, बार, होटल खुले रखने को कहा है, ताकि लोग नए साल पर पार्टी वगैरह कर सकें.
31 दिसंबर की शाम को शहरों में लोग पार्टी करते हैं और नए साल का स्वागत करते हैं. ऐसे में अक्सर लोगों की मांग रहती है कि देर तक होटल और बार खुले रहें.
मुंबई पुलिस के डीसीपी और पीआरओ मंजूनाथ सिंगे ने बताया है कि 31 दिसंबर की रात मुंबई में 40 हज़ार सुरक्षाकर्मी तैनात किए जाएंगे, ताकि किसी भी गड़बड़ी की आशंका को खत्म किया जा सके.
Monday, December 31, 2018
Wednesday, December 26, 2018
सुरक्षा में फेल, पतंजलि ने कैंसिल की किंभो ऐप की रिलॉन्चिंग
इस साल की शुरुआत में बाबा रामदेव के पतंजलि ब्रांड ने अपने नए सोशल मैसेजिंग ऐप किंभो के साथ टेक की दुनिया में कदम रखा था. अब दो बार असफल होने के बाद कंपनी ने फिलहाल इस ऐप को रिलॉन्च करने का इरादा छोड़ दिया है. ये जानकारी एक रिपोर्ट के हवाले से मिली है.
द प्रिंट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अदिति कमल का साथ छोड़ने के बाद पतंजलि ने नोएडा बेस्ड ऐप मेकिंग फर्म सोशल रिवोल्यूशन मीडिया एंड रिसर्च प्राइवेट लिमिटेड के साथ साझेदारी की थी. आपको बता दें पतंजलि द्वारा मैसेजिंग प्लेटफॉर्म उतारने का आइडिया अदिति कमल का ही था.
मई और अगस्त में किंभो ऐप को दो बार लॉन्च किया गया. लेकिन दोनों ही लॉन्च असफल रहे, क्योंकि ये सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स को पसंद नहीं आए. इसके बाद कंपनी ने फिलहाल के लिए ऐप को फिर से लॉन्च करने का इरादा छोड़ दिया है.
पतंजलि आयुर्वेद के सीईओ और मैनेजिंग डायरेक्टर आचार्य बालकृष्ण ने पब्लिकेशन से कहा कि हम टेक्निकल तरीके से परिपक्व और बेहद सिक्योर ऐप लॉन्च करना चाहते थे. हालांकि अभी हम किए गए काम से संतुष्ट नहीं हैं. हमने फिलहाल ऐप लॉन्च करने का आइडिया छोड़ दिया है क्योंकि हम आधा-अधूरा तैयार प्रोडक्ट बाजार में नहीं उतारना चाहते.
उन्होंने आगे कहा कि वर्तमान में, हम नए प्रोजेक्ट्स के साथ काफी व्यस्त हैं और मुझे नहीं लगता है कि हमारे पास किम्भो में आगे लगाने के लिए समय और संसाधन हैं. फिलहाल हमने इस प्रोजेक्ट को साइड रख दिया है और इसकी दोबारा लॉन्चिंग के लिए कोई तारीख तय नहीं की गई है.
पतंजलि किंभो ऐप की ब्रांडिंग 'स्वदेशी चैट ऐप' के रूप में की गई थी. जो भारत में फेसबुक के स्वामित्व वाले वॉट्सऐप की जगह ले सके. इस ऐप को सबसे पहले 30 मई को लॉन्च किया गया था. हालांकि खराब सिक्योरिटी फीचर्स होने की वजह से इसे 24 घंटे के भीतर गूगल प्ले स्टोर से हटा दिया गया था.
इसके बाद इस ऐप के ट्रायल वर्जन को 27 अगस्त के आधिकारिक लॉन्च से पहले एंड-टू-एंड एनक्रिप्शन के साथ 15 अगस्त को दोबारा लॉन्च किया गया. लेकिन जब ढेरों यूजर्स ने आ रही दिक्कतों को रिपोर्ट किया फिर ऑफिशियल लॉन्च से पहले ही इसे सुरक्षा कारणों के चलते गूगल प्ले स्टोर से हटा लिया गया और लॉन्च टल गया.
द प्रिंट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अदिति कमल का साथ छोड़ने के बाद पतंजलि ने नोएडा बेस्ड ऐप मेकिंग फर्म सोशल रिवोल्यूशन मीडिया एंड रिसर्च प्राइवेट लिमिटेड के साथ साझेदारी की थी. आपको बता दें पतंजलि द्वारा मैसेजिंग प्लेटफॉर्म उतारने का आइडिया अदिति कमल का ही था.
मई और अगस्त में किंभो ऐप को दो बार लॉन्च किया गया. लेकिन दोनों ही लॉन्च असफल रहे, क्योंकि ये सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स को पसंद नहीं आए. इसके बाद कंपनी ने फिलहाल के लिए ऐप को फिर से लॉन्च करने का इरादा छोड़ दिया है.
पतंजलि आयुर्वेद के सीईओ और मैनेजिंग डायरेक्टर आचार्य बालकृष्ण ने पब्लिकेशन से कहा कि हम टेक्निकल तरीके से परिपक्व और बेहद सिक्योर ऐप लॉन्च करना चाहते थे. हालांकि अभी हम किए गए काम से संतुष्ट नहीं हैं. हमने फिलहाल ऐप लॉन्च करने का आइडिया छोड़ दिया है क्योंकि हम आधा-अधूरा तैयार प्रोडक्ट बाजार में नहीं उतारना चाहते.
उन्होंने आगे कहा कि वर्तमान में, हम नए प्रोजेक्ट्स के साथ काफी व्यस्त हैं और मुझे नहीं लगता है कि हमारे पास किम्भो में आगे लगाने के लिए समय और संसाधन हैं. फिलहाल हमने इस प्रोजेक्ट को साइड रख दिया है और इसकी दोबारा लॉन्चिंग के लिए कोई तारीख तय नहीं की गई है.
पतंजलि किंभो ऐप की ब्रांडिंग 'स्वदेशी चैट ऐप' के रूप में की गई थी. जो भारत में फेसबुक के स्वामित्व वाले वॉट्सऐप की जगह ले सके. इस ऐप को सबसे पहले 30 मई को लॉन्च किया गया था. हालांकि खराब सिक्योरिटी फीचर्स होने की वजह से इसे 24 घंटे के भीतर गूगल प्ले स्टोर से हटा दिया गया था.
इसके बाद इस ऐप के ट्रायल वर्जन को 27 अगस्त के आधिकारिक लॉन्च से पहले एंड-टू-एंड एनक्रिप्शन के साथ 15 अगस्त को दोबारा लॉन्च किया गया. लेकिन जब ढेरों यूजर्स ने आ रही दिक्कतों को रिपोर्ट किया फिर ऑफिशियल लॉन्च से पहले ही इसे सुरक्षा कारणों के चलते गूगल प्ले स्टोर से हटा लिया गया और लॉन्च टल गया.
Sunday, December 16, 2018
आख़िर नेपाल ने क्यों बैन किए भारतीय नोट
नेपाल की सरकार ने भारतीय मुद्रा के सौ से ऊपर के नोटों पर पाबंदी लगा दी है. मतलब नेपाल में सौ से ऊपर के भारतीय नोट नहीं चलेंगे. पाबंदी के पहले तक नेपाल में स्थानीय मुद्रा के साथ भारत के सभी नोट भी चलन में थे.
आख़िर नेपाल ने अचानक से ये फ़ैसला क्यों लिया? हाल ही में नेपाल के मंत्रियों की एक बैठक हुई थी और इसी बैठक में यह फ़ैसला लेकर एक नोटिस जारी किया गया कि 200, 500 और 2,000 के भारतीय नोट नेपाल में अवैध होंगे.
सबसे दिलचस्प ये है कि नेपाल ने इसकी कोई वजह नहीं बताई है. नेपाल की तरफ़ से जो आधिकारिक नोटिस जारी किया गया, उसमें भी कोई कारण नहीं बताया गया है. ऐसे में सवाल उठता है कि नेपाल को अचानक इसकी क्या ज़रूरत आन पड़ी?
काठमांडू स्थित वरिष्ठ पत्रकार युवराज घिमरे कहते हैं कि ये फ़ैसला क्यों लिया गया, अभी तक साफ़ नहीं है.
वो कहते हैं, ''ज़ाहिर है इसका असर लोगों पर पड़ेगा. ख़ासकर सीमाई इलाक़ों में भारतीय व्यापारियों को समस्या होगी. मुझे नहीं लगता है कि इससे भारत को कोई नुक़सान होगा. दोनों देशों के उन कामगारों को दिक़्क़त होगी जो एक दूसरे के देश में काम या व्यापार करते हैं.''
प्रभावी होगा फ़ैसला?
नेपाल सरकार का ये फ़ैसला कितना व्यावहारिक होगा? क्या इस फ़ैसले से लोग 100 से ऊपर के नोटों से लेनदेन बंद कर देंगे? इस सवाल के जवाब में घिमरे कहते हैं, ''ये सवाल वाक़ई अहम है कि क्या सरकार का फ़ैसला प्रभावी होगा? वो भी तब जब ये नोट न लेने वाले को दिक़्क़त है और न देने वाले को.''
हालांकि घिमरे कहते हैं कि भारतीय नोट पर पाबंदी लगाने की एक ऐतिहासिक पृष्ठभूमि भी है. वो कहते हैं, ''1999 में जब भारत के यात्री विमान को आतंकियों ने हाईजैक किया था तब भारत सरकार के आग्रह पर नेपाल ने 500 के नोट को बैन कर दिया था. भारत ने जब नोटबंदी की तो नेपाल में भी करोड़ों के 500 और 1000 के पुराने भारतीय नोट थे. अब तक इन पुराने नोटों का कोई समाधान नहीं निकल पाया है. ज़ाहिर है भारत के नोटबंदी के फ़ैसले से नेपाल को नुक़सान हुआ. लेकिन नेपाल ने अभी जो फ़ैसला लिया है उससे इस पर कोई असर नहीं पड़ेगा.''
पहले भी थी पाबंदी
नेपाल के बाज़ार में पारंपरिक रूप से भारतीय नोट स्वीकार्य हैं. भारत में भी नेपाली नागरिकों के लिए नौकरी और कारोबार करने की छूट है. भारत के फ़ेमा क़ानून यानी फ़ॉरन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट के अनुसार नेपाल जाने वाला व्यक्ति अपने साथ 25 हज़ार की नक़दी लेकर जा सकता है.
आख़िर नेपाल ने अचानक से ये फ़ैसला क्यों लिया? हाल ही में नेपाल के मंत्रियों की एक बैठक हुई थी और इसी बैठक में यह फ़ैसला लेकर एक नोटिस जारी किया गया कि 200, 500 और 2,000 के भारतीय नोट नेपाल में अवैध होंगे.
सबसे दिलचस्प ये है कि नेपाल ने इसकी कोई वजह नहीं बताई है. नेपाल की तरफ़ से जो आधिकारिक नोटिस जारी किया गया, उसमें भी कोई कारण नहीं बताया गया है. ऐसे में सवाल उठता है कि नेपाल को अचानक इसकी क्या ज़रूरत आन पड़ी?
काठमांडू स्थित वरिष्ठ पत्रकार युवराज घिमरे कहते हैं कि ये फ़ैसला क्यों लिया गया, अभी तक साफ़ नहीं है.
वो कहते हैं, ''ज़ाहिर है इसका असर लोगों पर पड़ेगा. ख़ासकर सीमाई इलाक़ों में भारतीय व्यापारियों को समस्या होगी. मुझे नहीं लगता है कि इससे भारत को कोई नुक़सान होगा. दोनों देशों के उन कामगारों को दिक़्क़त होगी जो एक दूसरे के देश में काम या व्यापार करते हैं.''
प्रभावी होगा फ़ैसला?
नेपाल सरकार का ये फ़ैसला कितना व्यावहारिक होगा? क्या इस फ़ैसले से लोग 100 से ऊपर के नोटों से लेनदेन बंद कर देंगे? इस सवाल के जवाब में घिमरे कहते हैं, ''ये सवाल वाक़ई अहम है कि क्या सरकार का फ़ैसला प्रभावी होगा? वो भी तब जब ये नोट न लेने वाले को दिक़्क़त है और न देने वाले को.''
हालांकि घिमरे कहते हैं कि भारतीय नोट पर पाबंदी लगाने की एक ऐतिहासिक पृष्ठभूमि भी है. वो कहते हैं, ''1999 में जब भारत के यात्री विमान को आतंकियों ने हाईजैक किया था तब भारत सरकार के आग्रह पर नेपाल ने 500 के नोट को बैन कर दिया था. भारत ने जब नोटबंदी की तो नेपाल में भी करोड़ों के 500 और 1000 के पुराने भारतीय नोट थे. अब तक इन पुराने नोटों का कोई समाधान नहीं निकल पाया है. ज़ाहिर है भारत के नोटबंदी के फ़ैसले से नेपाल को नुक़सान हुआ. लेकिन नेपाल ने अभी जो फ़ैसला लिया है उससे इस पर कोई असर नहीं पड़ेगा.''
पहले भी थी पाबंदी
नेपाल के बाज़ार में पारंपरिक रूप से भारतीय नोट स्वीकार्य हैं. भारत में भी नेपाली नागरिकों के लिए नौकरी और कारोबार करने की छूट है. भारत के फ़ेमा क़ानून यानी फ़ॉरन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट के अनुसार नेपाल जाने वाला व्यक्ति अपने साथ 25 हज़ार की नक़दी लेकर जा सकता है.
Monday, December 10, 2018
रेखा ने शाहरुख खान संग किया 'रश्के कमर...' पर डांस, देखें वीडियो
बॉलीवुड की अदाकारा रेखा लंबे वक्त से पर्दे से दूर हैं लेकिन उनका चार्म आज भी बरकरार है. इस बात को एक बार फिर रेखा ने 'लक्स गोल्डन रोज अवॉर्ड्स' में साबित कर दिया. इस अवॉर्ड शो को स्टार प्लस पर रविवार रात टेलीकास्ट किया गया. शो को होस्ट शाहरुख खान ने किया.
'लक्स गोल्डन रोज अवॉर्ड्स' में रेखा को टाइमलेस ब्यूटी के अवॉर्ड से नवाजा गया. इस अवॉर्ड शो में रेखा अपने सदाबहार लुक ट्रेडिशनल कांजीवरम साड़ी में पहुंचीं. रेखा जब स्टेज पर आईं तो शाहरुख खान और करण जौहर ने उन्हें सम्मान दिया. अवॉर्ड स्पीच में रेखा ने कहा कि ये सम्मान मेरे लिए खास है क्योंकि मेरी मां को भी लक्स गोल्डन रोज एक्ट्रेस में जब चुना गया तब मेरा जन्म हुआ था. आज 63 साल बाद मैं भी वहां पहुंच गई हूं. मेरे लिए ये सम्मान बहुत खास है.
स्पीच देने के बाद बाद रेखा जैसे ही जाने लगीं तभी शाहरुख खान ने कहा, "रेखा जी आपकी अदाओं की दुनिया कायल है लेकिन मैं आपसे कुछ कहना चाहता हूं. आजकल एक नया गाना आया है रश्के कमर... आप इस पर डांस करती तो कैसा होता." किंग खान की रिक्वेस्ट को मानते हुए रेखा ने इस गाने पर शाहरुख के साथ डांस किया. रेखा का ये यादगार डांस वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.
वहीं मध्य प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने मतगणना की वेबकास्टिंग न करने के निर्देश दिए हैं. साथ ही यह निर्देश जारी किए गए हैं कि काउंटिग हॉल में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं और मतगणना के दौरान वाईफाई का इस्तेमाल न हो.
गौरतलब है कि कुछ दिनों पहले मध्य प्रदेश के एक निजी होटल में ईवीएम मशीन और सागर जिले में बिना नंबर की स्कूल बस से स्ट्रॉन्ग रूम में ईवीएम पहुंचाए जाने का वीडियो जारी करते हुए कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि बीजेपी मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में जनादेश को पटलने की कोशिश कर रही है. वहीं, एक अन्य मामले में शुक्रवार को ही मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में लगभग एक घंटे के लिए बिजली नहीं होने की वजह से स्ट्रॉन्ग रूम का सीसीटीवी और एलईडी डिस्प्ले इस अवधि में काम नहीं कर पाया.
इन शिकायतों पर चुनाव आयोग ने भी माना है कि मध्य प्रदेश में ऐसी दो घटनाएं हुईं थीं जिसमें ईवीएम को लेकर नियमावली का पालन नहीं किया गया. लेकिन आयोग का कहना था कि यह गलती प्रक्रिया तक ही सीमित है और मशीनों से कोई छेड़छाड़ नहीं की गई. लेकिन आयोग ने एक अधिकारी को मशीने देरी से जमा कराने के आरोप में सस्पेंड कर दिया.
'लक्स गोल्डन रोज अवॉर्ड्स' में रेखा को टाइमलेस ब्यूटी के अवॉर्ड से नवाजा गया. इस अवॉर्ड शो में रेखा अपने सदाबहार लुक ट्रेडिशनल कांजीवरम साड़ी में पहुंचीं. रेखा जब स्टेज पर आईं तो शाहरुख खान और करण जौहर ने उन्हें सम्मान दिया. अवॉर्ड स्पीच में रेखा ने कहा कि ये सम्मान मेरे लिए खास है क्योंकि मेरी मां को भी लक्स गोल्डन रोज एक्ट्रेस में जब चुना गया तब मेरा जन्म हुआ था. आज 63 साल बाद मैं भी वहां पहुंच गई हूं. मेरे लिए ये सम्मान बहुत खास है.
स्पीच देने के बाद बाद रेखा जैसे ही जाने लगीं तभी शाहरुख खान ने कहा, "रेखा जी आपकी अदाओं की दुनिया कायल है लेकिन मैं आपसे कुछ कहना चाहता हूं. आजकल एक नया गाना आया है रश्के कमर... आप इस पर डांस करती तो कैसा होता." किंग खान की रिक्वेस्ट को मानते हुए रेखा ने इस गाने पर शाहरुख के साथ डांस किया. रेखा का ये यादगार डांस वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.
वहीं मध्य प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने मतगणना की वेबकास्टिंग न करने के निर्देश दिए हैं. साथ ही यह निर्देश जारी किए गए हैं कि काउंटिग हॉल में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं और मतगणना के दौरान वाईफाई का इस्तेमाल न हो.
गौरतलब है कि कुछ दिनों पहले मध्य प्रदेश के एक निजी होटल में ईवीएम मशीन और सागर जिले में बिना नंबर की स्कूल बस से स्ट्रॉन्ग रूम में ईवीएम पहुंचाए जाने का वीडियो जारी करते हुए कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि बीजेपी मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में जनादेश को पटलने की कोशिश कर रही है. वहीं, एक अन्य मामले में शुक्रवार को ही मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में लगभग एक घंटे के लिए बिजली नहीं होने की वजह से स्ट्रॉन्ग रूम का सीसीटीवी और एलईडी डिस्प्ले इस अवधि में काम नहीं कर पाया.
इन शिकायतों पर चुनाव आयोग ने भी माना है कि मध्य प्रदेश में ऐसी दो घटनाएं हुईं थीं जिसमें ईवीएम को लेकर नियमावली का पालन नहीं किया गया. लेकिन आयोग का कहना था कि यह गलती प्रक्रिया तक ही सीमित है और मशीनों से कोई छेड़छाड़ नहीं की गई. लेकिन आयोग ने एक अधिकारी को मशीने देरी से जमा कराने के आरोप में सस्पेंड कर दिया.
Tuesday, December 4, 2018
11 दिसंबर के बाद सिद्धू को मिल सकती है बड़ी भूमिका
कैप्टन अमरिंदर सिंह और उनके वफ़ादारों को नवजोत सिंह सिद्धू के उभार को भविष्य में होने वाले बदलाव के स्पष्ट संकेत के रूप में लेना चाहिए.
सिद्धू को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का विश्वास हासिल है और चुनावों के दौरान कांग्रेस के स्टार प्रचारक के रूप में राहुल और सोनिया गांधी के बाद सबसे ज़्यादा उन्हीं की मांग रहती है.
प्रचार के लिए सिद्धू की डिमांड कांग्रेस वर्किंग कमेटी के सदस्यों, ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी के महासचिवों और कांग्रेस के शासन वाले राज्यों के मुख्यमंत्रियों से भी ज़्यादा है. इनमें अमरिंदर भी शामिल हैं, जिनका पंजाब से बाहर बहुत कम प्रभाव है.
दूसरे शब्दों में कहें तो पटियाला के इस दिलकश बल्लेबाज़ का समय अच्छा चल रहा है और उम्मीद है कि 2022 के आसपास या उससे पहले ही उन्हें पंजाब में बड़ी भूमिका मिल सकती है. पंजाब में 2022 में विधानसभा चुनाव होंगे.
भले ही कभी पार्टी अनुशासन, शालीनता और राजनीतिक मर्यादाओं की महीन लक्ष्मण रेखा का उल्लंघन हो जाए लेकिन सिद्धू शब्दों से खेलना बख़ूबी जानते हैं.
इसलिए उनका अमरिंदर सिंह को अभिभावक, मार्गदर्शक और नेता बताना अपने शब्द वापस लेने या माफ़ी मांगने के बजाय आत्मीय संबंध जोड़ने वाला नज़र आया.
करतारपुर के हीरो साबित हुए सिद्धू
करतारपुर साहिब कॉरिडोर खुलने के घटनाक्रम से पहले अमरिंदर जहां उदासीन से नज़र आए वहीं सिद्धू काफ़ी सक्रिय रहे.
सिद्धू में राहुल और कांग्रेस को ऐसा नेता मिला है जो अकालियों और अमरिंदर दोनों से बढ़कर साबित हुआ है.
सिखों के बीच सिद्धू करतारपुर के असली हीरो हैं. हाल ही में पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के दौरान सिद्धू ने जोशीला अभियान चलाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य विरोधियों पर निशाना साधा.
11 दिसंबर तय करेगा सिद्धू का भविष्य
सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने सिद्धू को कैप्टन अमरिंदर सिंह की मर्ज़ी के ख़िलाफ़ उस समय पार्टी में जगह दी थी, जब उनका बीजेपी और आम आदमी पार्टी के साथ मोलभाव सिरे नहीं चढ़ पाया था.
अगर आगामी 11 दिसंबर को पार्टी राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, मिज़ोरम और तेलंगाना में बेहतर प्रदर्शन करती है तो पंजाब की राजनीति में थोड़ी हलचल हो सकती है.
कांग्रेस में जब भी किसी क्षेत्रीय नेता की छवि बड़ी होने लगती है और वह स्वतंत्र रूप से काम करना शुरू करता है, पार्टी हाईकमान दूसरी पंक्ति के नेतृत्व को उभारना शुरू कर देता है.
सोनिया और राहुल भले ही इंदिरा और राजीव की तरह मनमर्ज़ी से कम ही काम करते हैं लेकिन 11 दिसंबर के बाद अगर कांग्रेस दो-तीन राज्यों में जीत जाती है तो इससे राहुल गांधी का क़द और प्रभाव बढ़ेगा.
राहुल के उदय से चंडीगढ़ में भी उनके विश्वस्त लोग उभरेंगे, जहां पार्टी और सरकार 76 साल के ऐसे कैप्टन के नेतृत्व में काम कर रही है जिसकी छवि 'जी हुज़ूरी' न करने वाले मुख्यमंत्रियों की है.
सिद्धू को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का विश्वास हासिल है और चुनावों के दौरान कांग्रेस के स्टार प्रचारक के रूप में राहुल और सोनिया गांधी के बाद सबसे ज़्यादा उन्हीं की मांग रहती है.
प्रचार के लिए सिद्धू की डिमांड कांग्रेस वर्किंग कमेटी के सदस्यों, ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी के महासचिवों और कांग्रेस के शासन वाले राज्यों के मुख्यमंत्रियों से भी ज़्यादा है. इनमें अमरिंदर भी शामिल हैं, जिनका पंजाब से बाहर बहुत कम प्रभाव है.
दूसरे शब्दों में कहें तो पटियाला के इस दिलकश बल्लेबाज़ का समय अच्छा चल रहा है और उम्मीद है कि 2022 के आसपास या उससे पहले ही उन्हें पंजाब में बड़ी भूमिका मिल सकती है. पंजाब में 2022 में विधानसभा चुनाव होंगे.
भले ही कभी पार्टी अनुशासन, शालीनता और राजनीतिक मर्यादाओं की महीन लक्ष्मण रेखा का उल्लंघन हो जाए लेकिन सिद्धू शब्दों से खेलना बख़ूबी जानते हैं.
इसलिए उनका अमरिंदर सिंह को अभिभावक, मार्गदर्शक और नेता बताना अपने शब्द वापस लेने या माफ़ी मांगने के बजाय आत्मीय संबंध जोड़ने वाला नज़र आया.
करतारपुर के हीरो साबित हुए सिद्धू
करतारपुर साहिब कॉरिडोर खुलने के घटनाक्रम से पहले अमरिंदर जहां उदासीन से नज़र आए वहीं सिद्धू काफ़ी सक्रिय रहे.
सिद्धू में राहुल और कांग्रेस को ऐसा नेता मिला है जो अकालियों और अमरिंदर दोनों से बढ़कर साबित हुआ है.
सिखों के बीच सिद्धू करतारपुर के असली हीरो हैं. हाल ही में पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के दौरान सिद्धू ने जोशीला अभियान चलाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य विरोधियों पर निशाना साधा.
11 दिसंबर तय करेगा सिद्धू का भविष्य
सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने सिद्धू को कैप्टन अमरिंदर सिंह की मर्ज़ी के ख़िलाफ़ उस समय पार्टी में जगह दी थी, जब उनका बीजेपी और आम आदमी पार्टी के साथ मोलभाव सिरे नहीं चढ़ पाया था.
अगर आगामी 11 दिसंबर को पार्टी राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, मिज़ोरम और तेलंगाना में बेहतर प्रदर्शन करती है तो पंजाब की राजनीति में थोड़ी हलचल हो सकती है.
कांग्रेस में जब भी किसी क्षेत्रीय नेता की छवि बड़ी होने लगती है और वह स्वतंत्र रूप से काम करना शुरू करता है, पार्टी हाईकमान दूसरी पंक्ति के नेतृत्व को उभारना शुरू कर देता है.
सोनिया और राहुल भले ही इंदिरा और राजीव की तरह मनमर्ज़ी से कम ही काम करते हैं लेकिन 11 दिसंबर के बाद अगर कांग्रेस दो-तीन राज्यों में जीत जाती है तो इससे राहुल गांधी का क़द और प्रभाव बढ़ेगा.
राहुल के उदय से चंडीगढ़ में भी उनके विश्वस्त लोग उभरेंगे, जहां पार्टी और सरकार 76 साल के ऐसे कैप्टन के नेतृत्व में काम कर रही है जिसकी छवि 'जी हुज़ूरी' न करने वाले मुख्यमंत्रियों की है.
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