中国国务院日前发布《粤港澳大湾区发展规划纲要》后,广东、香港和澳门三地政府在香港举行“粤港澳大湾区发展规划纲要宣讲会”,三地政府首长和北京政府官员在会上先后发言,分别都表示会支持大湾区发展。
除了香港和澳门,大湾区还覆盖包括广州、深圳、佛山、东莞、惠州、中山、珠海、江门和肇庆等广东省多个城市组成的城市群。国务院的规划纲要指出,大湾区的发展主要是让区内城市互补优势,也提出大湾区内各个城市负责的角色。
各方对计划有不同的看法。一些意见认为,纲要的内容没有提出具体实行的方案,而宣讲会也没有对计划作出详细说明,显示各方官员要克服粤港澳三地不同体制并不是一件容易的事。但支持的意见指出,这个纲要只是要指出“大方向”,具体的措施要各方稍后讨论确定。
香港社会也有一些声音批评,这个纲要指明香港的发展方向,这种做法等于香港“被规划”。另外一些意见忧虑,香港会在大湾区的发展中失去独特性,长远来说角色会被“矮化”。
香港特首林郑月娥在周四(2月21日)的宣讲会中表示,香港会不遗余力推动大湾区的发展,计划也不会抵触一国两制,而是“丰富‘一国两制’的内涵”。广东省省长马兴瑞就表示会出动“全省之力”,与港澳做好大湾区建设。
另外, 澳门特首崔世安就表示,澳门正不断充实它中葡双语人才发展基地等优势,使大湾区成为“一带一路”的重要支撑。
巴西驻香港总领事塔拉戈(Piragibe Tarrago)出席宣讲会后接受BBC中文访问时说,他认为大湾区的发展对中国与巴西的关系会有正面影响,他又指如果大湾区的计划成功,可以为巴西产品提供更大的市场。
他同时认为,目前需要观望计划会否有“实质达成的结果”。
一家总部设在香港的房地产发展公司的融资总监赵慧接受BBC中文时表示,她出席宣讲会是为了了解当局对大湾区房地产方面的政策,发掘商机。
被问及她是否认为目前公布的资料欠缺具体措施时,她认为这个政策必须先推行框架,然后才会深化,因此“完全不用担心”。
《粤港澳大湾区发展规划纲要》详细列出中国南方包括香港和澳门等多个城市联合发展的计划,目标是到2022年的时候令这个地区“综合实力显著增强”,到2035年形成一个“以创新为主要支撑的经济体系和发展模式”。纲要其中一个重点,是说明大湾区中,香港、澳门、广州和深圳四个“中心城市”各自的角色:
香港:巩固和提升国际金融、航运、贸易中心和国际航空 枢纽地位,强化全球离岸人民币业务枢纽地位
澳门:建设世界旅游休闲中心、中国与葡语国家商贸合作服务平台
广州:全面增强国际商贸中心、综合交通枢纽功能,培育提升科技教育文化中心功能,着力建设国际大都市
深圳:发挥作为经济特区、全国性经济中心城市和国家创新型城市的引领作用。
另外,纲要提出推动各地在教育、就业、基建和通讯等方面的整合,包括在广东建立港澳子弟学校、容许港澳居民中的中国公民在中国大陆国有企业工作,也研究让这些人报考中国大陆公务员,促进各地交流。
中国官方全国港澳研究会理事张燕生接受香港《明报》专访时指出,大湾区城市谁主导哪些领域,主要看各个城市的能力。“比如金融,全球优势在香港,创新全球优势在深圳,陶瓷制造业在佛山,看主导的是什么。”
虽然规划纲要强调要促进广东、香港和澳门居民之间流通,张燕生指出北京政府过去制定中国大陆居民来往港澳的政策时考虑得不够好,大陆客大规模访问港澳令当地市民产生巨大反弹。他认为从这角度说,北京政府要在通关便利方面有所约束,“一点一点探索前行”。
中国官方《人民日报》海外版旗下的微信公众号“侠客岛”引述中国华南理工大学公共政策研究院学术委员会主席郑永年指,大湾区计划可以协助区内城市突破产业单一的问题。他举例说,香港有很多新技术,却没有市场,而邻近的珠三角地区有庞大的市场,技术却不如香港。
他在访问中以欧盟为例子,指出欧盟由不同国家组成,成员国之间的资源仍然可以频繁流动。欧盟目前面对的问题,是因为它没有超越主权政府的实体组织从中协调。而大湾区的城市都属中国,有中央政府从中协调,令它可以仿效欧盟的“高标准、好做法”,又避免欧盟缺乏协调产生的弊病。
但经济学人智库(Economist Intelligence Unit)中国经济分析师苏月形容,国务院发出的《规划纲要》内容模糊,认为这显示官员要达成计划的目标十分困难。她接受BBC中文访问时补充,纲要没有解释在“一国两制”的框架下,如何解决香港、澳门和中国大陆之间的监管差异。
她认为周四的宣讲会没有为大湾区计划提供更具体的说明,而更多是像一种“表决心”的会议,让各方表明会支持这个计划,“但是并没有就这个规划本身的内容点出一些细节”。
Sunday, February 24, 2019
Tuesday, February 19, 2019
सेना ने कहा- कई गाजी आए और चले गए; कश्मीर में जो आतंकी घुसेगा, जिंदा नहीं लौटेगा
श्रीनगर. सेना ने मंगलवार को चेतावनी दी कि कश्मीर में कई गाजी आए और चले गए, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। साथ ही कश्मीरी मांओं से अपील की कि वे अपने बेटों से आतंक का रास्ता छोड़ने को कहें। अगर उन्होंने (बेटों ने) बंदूक उठाई तो वे मारे जाएंगे।
सुरक्षा बलों (आर्मी, सीआरपीएफ और पुलिस) ने मंगलवार को श्रीनगर में संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इसमें कहा गया, "जैश-ए-मोहम्मद पाकिस्तान आर्मी का ही बच्चा है। पुलवामा हमले में पाक आर्मी भी शामिल है। जैश ने हमेशा सिक्योरिटी फोर्स पर हमला किया है। हमारा ध्यान उसे खत्म करने पर है। हम इसमें बेहतर कर रहे हैं।"
'आतंकियों को रोक देते हैं'
लेफ्टिनेंट जनरल केजेएस ढिल्लन ने कहा, "विस्फोटक को लेकर सूचनाएं मिली हैं। हम उसे यहां नहीं बता सकते। आतंकी बहुत सी घटनाओं को अंजाम देना चाहते हैं, लेकिन हम उन्हें रोक देते हैं। पुलवामा हमले के 100 घंटे से भी कम समय में कश्मीर में जैश के नेतृत्व को खत्म कर दिया गया। यह पाक स्थित जैश मुख्यालय से ही संचालित होता था।"
"14 फरवरी को जिस तरह के कार बम से हमला किया गया, ऐसा कश्मीर में लंबे वक्त के बाद हुआ। इस तरह के हमले से निपटने के लिए हमने सभी विकल्प खुले रखे हैं।"
"हमले में घायल हुए ब्रिगेडियर हरदीप सिंह ने अपनी छुट्टियां कम ली हैं। वह मौके पर जाकर ऑपरेशन को लीड करेंगे।"
"ठंड और खराब मौसम के कारण घुसपैठ की घटनाएं बढ़ी हैं, जिन्हें हम रोकने की कोशिश कर रहे हैं। पाकिस्तान घुसपैठ की कोशिश कर रहा है। कश्मीर घाटी में हम आतंकियों को खत्म करने में लगे हैं।"
"हाईवे और सेना के जवानों पर हमला प्लान के तहत किया गया। हम हमले से 3-4 दिन पहले भी उस रास्ते से गए थे, उस वक्त सब सामान्य था। काफिले के दौरान ट्रैफिक के नियमों को बदला जाएगा और अमल में भी लाया जाएगा।"
"कामरान ने पुलवामा में हमला करवाया था। उस घटना के दौरान गाड़ी में विस्फोटक था। पिछले साल हमने 250 से ज्यादा आतंकियों को मारा। वे (आतंकी) लोगों को भर्ती करने में लगे हैं। हम मुख्य रूप से आतंकियों की पहचान करने में लगे हैं। जल्द ही समस्या को खत्म कर दिया जाएगा।"
"हम किसी भी नागरिक को परेशान नहीं कर रहे। किसी को प्रोपेगैंडा नहीं फैलाना चाहिए। हम आतंकियों को खत्म करने के लिए लगातार प्रयास कर रहे और उनकी योजनाओं को विफल कर रहे।"
"स्थानीय लोगों की भर्तियां कम हो रही है। हम सकारात्मक सोच के साथ योजना बना रहे हैं। सीआरपीएफ काफिले पर हमला पाकिस्तान और जैश के कहने पर हुआ। इसमें स्थानीयों का कितना हाथ है, इसकी जांच की जा रही है।"
कश्मीर के आईजी एसपी सैनी ने कहा कि बीते 3 महीने में आतंकियों की भर्ती में खासी गिरावट आई है। इसमें परिवारों का भी बड़ा योगदान है। हम परिवारों से अपील करते हैं कि बच्चों को आतंकी बनने से रोकें।
सीआरपीएफ के जुल्फिकार हसन ने कहा कि पुलवामा हमला इसलिए हुआ क्योंकि विस्फोटक एक सिविलियन कार में भरा था। हमारी हेल्पलाइन 14411 से देशभर में रह रहे कश्मीरी मदद मांग सकते हैं। कश्मीर के बाहर पढ़ रहे कश्मीरी बच्चों की सुरक्षा का जिम्मा सुरक्षा बलों का है।
सुरक्षा बलों (आर्मी, सीआरपीएफ और पुलिस) ने मंगलवार को श्रीनगर में संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इसमें कहा गया, "जैश-ए-मोहम्मद पाकिस्तान आर्मी का ही बच्चा है। पुलवामा हमले में पाक आर्मी भी शामिल है। जैश ने हमेशा सिक्योरिटी फोर्स पर हमला किया है। हमारा ध्यान उसे खत्म करने पर है। हम इसमें बेहतर कर रहे हैं।"
'आतंकियों को रोक देते हैं'
लेफ्टिनेंट जनरल केजेएस ढिल्लन ने कहा, "विस्फोटक को लेकर सूचनाएं मिली हैं। हम उसे यहां नहीं बता सकते। आतंकी बहुत सी घटनाओं को अंजाम देना चाहते हैं, लेकिन हम उन्हें रोक देते हैं। पुलवामा हमले के 100 घंटे से भी कम समय में कश्मीर में जैश के नेतृत्व को खत्म कर दिया गया। यह पाक स्थित जैश मुख्यालय से ही संचालित होता था।"
"14 फरवरी को जिस तरह के कार बम से हमला किया गया, ऐसा कश्मीर में लंबे वक्त के बाद हुआ। इस तरह के हमले से निपटने के लिए हमने सभी विकल्प खुले रखे हैं।"
"हमले में घायल हुए ब्रिगेडियर हरदीप सिंह ने अपनी छुट्टियां कम ली हैं। वह मौके पर जाकर ऑपरेशन को लीड करेंगे।"
"ठंड और खराब मौसम के कारण घुसपैठ की घटनाएं बढ़ी हैं, जिन्हें हम रोकने की कोशिश कर रहे हैं। पाकिस्तान घुसपैठ की कोशिश कर रहा है। कश्मीर घाटी में हम आतंकियों को खत्म करने में लगे हैं।"
"हाईवे और सेना के जवानों पर हमला प्लान के तहत किया गया। हम हमले से 3-4 दिन पहले भी उस रास्ते से गए थे, उस वक्त सब सामान्य था। काफिले के दौरान ट्रैफिक के नियमों को बदला जाएगा और अमल में भी लाया जाएगा।"
"कामरान ने पुलवामा में हमला करवाया था। उस घटना के दौरान गाड़ी में विस्फोटक था। पिछले साल हमने 250 से ज्यादा आतंकियों को मारा। वे (आतंकी) लोगों को भर्ती करने में लगे हैं। हम मुख्य रूप से आतंकियों की पहचान करने में लगे हैं। जल्द ही समस्या को खत्म कर दिया जाएगा।"
"हम किसी भी नागरिक को परेशान नहीं कर रहे। किसी को प्रोपेगैंडा नहीं फैलाना चाहिए। हम आतंकियों को खत्म करने के लिए लगातार प्रयास कर रहे और उनकी योजनाओं को विफल कर रहे।"
"स्थानीय लोगों की भर्तियां कम हो रही है। हम सकारात्मक सोच के साथ योजना बना रहे हैं। सीआरपीएफ काफिले पर हमला पाकिस्तान और जैश के कहने पर हुआ। इसमें स्थानीयों का कितना हाथ है, इसकी जांच की जा रही है।"
कश्मीर के आईजी एसपी सैनी ने कहा कि बीते 3 महीने में आतंकियों की भर्ती में खासी गिरावट आई है। इसमें परिवारों का भी बड़ा योगदान है। हम परिवारों से अपील करते हैं कि बच्चों को आतंकी बनने से रोकें।
सीआरपीएफ के जुल्फिकार हसन ने कहा कि पुलवामा हमला इसलिए हुआ क्योंकि विस्फोटक एक सिविलियन कार में भरा था। हमारी हेल्पलाइन 14411 से देशभर में रह रहे कश्मीरी मदद मांग सकते हैं। कश्मीर के बाहर पढ़ रहे कश्मीरी बच्चों की सुरक्षा का जिम्मा सुरक्षा बलों का है।
Wednesday, February 13, 2019
पूर्वांचल में माफ़िया डॉन: बाहुबली नेता मुख़्तार अंसारी की कहानी
पूर्वांचल के मऊ से लगातार पाँचवी बार विधायक चुने गए माफ़िया नेता मुख़्तार अंसारी की कहानी के ढेर सारे पन्ने हैं.
लेकिन उनकी कहानी पर आने से पहले यह जानिए कि 2017 में जमा किए गए उनके अपने चुनावी शपथपत्रों के अनुसार उन पर फ़िलहाल देश की अलग-अलग अदालतों में हत्या, हत्या के प्रयास, हथियारबंद तरीक़े से दंगे भड़काने, आपराधिक साज़िश रचने, आपराधिक धमकियाँ देने, सम्पत्ति हड़पने के लिए धोखाधड़ी करने, सरकारी काम में व्यावधान पहुंचाने से लेकर जानबूझकर चोट पहुंचाने तक के 16 केस हैं.
एक वक़्त में उन पर मकोका (महाराष्ट्र कंट्रोल ऑफ़ ऑर्गनाइज्ड क्राइम ऐक्ट) और गैंगस्टर ऐक्ट के तहत 30 से ज़्यादा मुक़दमे दायर थे.
इनमें से कुछ अहम मामलों में अदालत ने सबूतों की कमी, गवाहों के पलट जाने और सरकारी वकील की कमज़ोर पैरवी के कारण इन्हें बरी कर दिया गया.
लेकिन भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक कृष्णानंद राय की हत्या समेत 16 गंभीर मामलों में इन पर अब भी मुक़दमे चल रहे हैं.
1996 में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के टिकट पर जीतकर पहली बार विधानसभा पहुंचने वाले मुख़्तार ने 2002, 2007, 2012 और फिर 2017 में भी मऊ से जीत हासिल की. इनमें से आख़िरी तीन चुनाव उन्होंने देश की अलग-अलग जेलों में बंद रहते हुए लड़े.
इस रिपोर्ट के सिलसिले में मैं पूर्वांचल में ग़ाज़ीपुर ज़िला स्थित मुख़्तार अंसारी के पैतृक निवास गई थी लेकिन आपको वहां का ब्यौरा बताने से पहले मुख़्तार की ज़िंदगी से जुड़े ये तीन ज़रूरी पन्ने :
अपराधी, अफ़ीम और आईएएस अफ़सर एक साथ पैदा करने वाला ग़ाज़ीपुर हमेशा से पूर्वांचल के गैंगवार की धुरी रहा है.
मुख़्तार अंसारी के राजनीतिक और आपराधिक समीकरणों में ग़ाज़ीपुर का महत्व बताते हुए वरिष्ठ पत्रकार उत्पल पाठक कहते हैं, "80 और 90 के दशक में अपने चरम पर रहा बृजेश सिंह और मुख़्तार का ऐतिहासिक गैंगवार यहीं ग़ाज़ीपुर से शुरू हुआ था.''
दोआब की उपजाऊ ज़मीन पर बसा ग़ाज़ीपुर ख़ास शहर है. राजनीतिक तौर पर देखें तो एक लाख से ज़्यादा भूमिहार जनसंख्या वाले ग़ाज़ीपुर को उत्तर प्रदेश में भूमिहारों के सबसे बड़े पॉकेट में से एक माना जाता है. यहां तक कि कुछ पुराने स्थानीय पत्रकार आम बोलचाल में ग़ाज़ीपुर को 'भूमिहारों का वैटिकन' भी कहते हैं.
देश के सबसे पिछड़े इलाक़ों में आने वाले ग़ाज़ीपुर में उद्योग के नाम पर यहां कुछ ख़ास नहीं है. अफ़ीम का काम होता है और हॉकी ख़ूब खेली जाती है. ग़ाज़ीपुर का एक महत्वपूर्ण विरोधाभास यह भी है कि अपराधियों और पूर्वांचल के गैंगवार की धुरी होने के साथ-साथ इस ज़िले से हर साल कई लड़के आईएएस-आईपीएस भी बनते हैं.
पाठक कहते हैं, "मुख़्तार अंसारी और उनके परिवार का राजनीतिक प्रभाव ग़ाज़ीपुर से लेकर मऊ, जौनपुर, बलिया और बनारस तक है. सिर्फ़ 8-10 प्रतिशत मुसलमान आबादी वाले ग़ाज़ीपुर में हमेशा से अंसारी परिवार हिंदू वोट बैंक के आधार पर चुनाव जीतता रहा है".
ग़ाज़ीपुर के 'प्रथम राजनीतिक परिवार' के तौर पर पहचाना जाने वाले अंसारी परिवार इस ज़िले और इससे जुड़े अनेक विरोधाभासों के सिलसिले को जैसे आगे ही बढ़ाता ही है.
मसलन, पिछले तक़रीबन 15 सालों से जेल में बंद मुख़्तार अंसारी के दादा देश की आज़ादी के संघर्ष में गांधी जी का साथ देने वाले नेता के रूप में जाने जाते हैं और 1926-27 में कांग्रेस के अध्यक्ष रहे डॉक्टर मुख़्तार अहमद अंसारी थे.
मुख़्तार अंसारी के नाना ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान को 1947 की लड़ाई में शहादत के लिए महावीर चक्र से नवाज़ा गया था.
ग़ाज़ीपुर में साफ़-सुथरी छवि रखने वाले और कम्युनिस्ट बैकग्राउंड से आने वाले मुख़्तार के पिता सुभानउल्ला अंसारी स्थानीय राजनीति में सक्रिय थे. भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी रिश्ते में मुख़्तार अंसारी के चाचा हैं.
मुख़्तार के बड़े भाई अफ़जाल अंसारी ग़ाज़ीपुर की मोहम्मदाबाद विधानसभा से लगतार 5 बार (1985 से 1996 तक) विधायक रह चुके हैं और 2004 में ग़ाज़ीपुर से ही सांसद का चुनाव भी जीत चुके हैं.
मुख़्तार के दूसरे भाई सिबकातुल्ला अंसारी भी 2007 और 2012 के चुनाव में मोहम्मदाबाद से ही विधायक रह चुके हैं.
मुख़्तार अंसारी के दो बेटे हैं. उनके बड़े बेटे अब्बास अंसारी शॉट-गन शूटिंग के चैंपियन रह चुके हैं. 2017 के चुनाव में मऊ ज़िले की ही घोसी विधानसभा सीट से अब्बास ने बसपा के टिकट पर अपना पहला चुनाव लड़ा था और 7 हज़ार वोटों से अंतर से हार गए थे.
मुख़्तार के छोटे बेटे उमर अंसारी भारत के बाहर पढ़ाई कर रहे हैं लेकिन पिछले विधानसभा चुनाव में वह भी पहली बार राजनीति में उतरे अपने पिता के पक्ष में मऊ के उनका चुनावी कैम्पेन चलाया.
ऐसे परिवार से आने वाले मुख़्तार का आपराधिक मुक़दमों से लदे माफ़िया नेता में तब्दील होना ग़ाज़ीपुर के अनेक विरोधाभासों का ही एक विस्तार लगता है.
लेकिन उनकी कहानी पर आने से पहले यह जानिए कि 2017 में जमा किए गए उनके अपने चुनावी शपथपत्रों के अनुसार उन पर फ़िलहाल देश की अलग-अलग अदालतों में हत्या, हत्या के प्रयास, हथियारबंद तरीक़े से दंगे भड़काने, आपराधिक साज़िश रचने, आपराधिक धमकियाँ देने, सम्पत्ति हड़पने के लिए धोखाधड़ी करने, सरकारी काम में व्यावधान पहुंचाने से लेकर जानबूझकर चोट पहुंचाने तक के 16 केस हैं.
एक वक़्त में उन पर मकोका (महाराष्ट्र कंट्रोल ऑफ़ ऑर्गनाइज्ड क्राइम ऐक्ट) और गैंगस्टर ऐक्ट के तहत 30 से ज़्यादा मुक़दमे दायर थे.
इनमें से कुछ अहम मामलों में अदालत ने सबूतों की कमी, गवाहों के पलट जाने और सरकारी वकील की कमज़ोर पैरवी के कारण इन्हें बरी कर दिया गया.
लेकिन भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक कृष्णानंद राय की हत्या समेत 16 गंभीर मामलों में इन पर अब भी मुक़दमे चल रहे हैं.
1996 में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के टिकट पर जीतकर पहली बार विधानसभा पहुंचने वाले मुख़्तार ने 2002, 2007, 2012 और फिर 2017 में भी मऊ से जीत हासिल की. इनमें से आख़िरी तीन चुनाव उन्होंने देश की अलग-अलग जेलों में बंद रहते हुए लड़े.
इस रिपोर्ट के सिलसिले में मैं पूर्वांचल में ग़ाज़ीपुर ज़िला स्थित मुख़्तार अंसारी के पैतृक निवास गई थी लेकिन आपको वहां का ब्यौरा बताने से पहले मुख़्तार की ज़िंदगी से जुड़े ये तीन ज़रूरी पन्ने :
अपराधी, अफ़ीम और आईएएस अफ़सर एक साथ पैदा करने वाला ग़ाज़ीपुर हमेशा से पूर्वांचल के गैंगवार की धुरी रहा है.
मुख़्तार अंसारी के राजनीतिक और आपराधिक समीकरणों में ग़ाज़ीपुर का महत्व बताते हुए वरिष्ठ पत्रकार उत्पल पाठक कहते हैं, "80 और 90 के दशक में अपने चरम पर रहा बृजेश सिंह और मुख़्तार का ऐतिहासिक गैंगवार यहीं ग़ाज़ीपुर से शुरू हुआ था.''
दोआब की उपजाऊ ज़मीन पर बसा ग़ाज़ीपुर ख़ास शहर है. राजनीतिक तौर पर देखें तो एक लाख से ज़्यादा भूमिहार जनसंख्या वाले ग़ाज़ीपुर को उत्तर प्रदेश में भूमिहारों के सबसे बड़े पॉकेट में से एक माना जाता है. यहां तक कि कुछ पुराने स्थानीय पत्रकार आम बोलचाल में ग़ाज़ीपुर को 'भूमिहारों का वैटिकन' भी कहते हैं.
देश के सबसे पिछड़े इलाक़ों में आने वाले ग़ाज़ीपुर में उद्योग के नाम पर यहां कुछ ख़ास नहीं है. अफ़ीम का काम होता है और हॉकी ख़ूब खेली जाती है. ग़ाज़ीपुर का एक महत्वपूर्ण विरोधाभास यह भी है कि अपराधियों और पूर्वांचल के गैंगवार की धुरी होने के साथ-साथ इस ज़िले से हर साल कई लड़के आईएएस-आईपीएस भी बनते हैं.
पाठक कहते हैं, "मुख़्तार अंसारी और उनके परिवार का राजनीतिक प्रभाव ग़ाज़ीपुर से लेकर मऊ, जौनपुर, बलिया और बनारस तक है. सिर्फ़ 8-10 प्रतिशत मुसलमान आबादी वाले ग़ाज़ीपुर में हमेशा से अंसारी परिवार हिंदू वोट बैंक के आधार पर चुनाव जीतता रहा है".
ग़ाज़ीपुर के 'प्रथम राजनीतिक परिवार' के तौर पर पहचाना जाने वाले अंसारी परिवार इस ज़िले और इससे जुड़े अनेक विरोधाभासों के सिलसिले को जैसे आगे ही बढ़ाता ही है.
मसलन, पिछले तक़रीबन 15 सालों से जेल में बंद मुख़्तार अंसारी के दादा देश की आज़ादी के संघर्ष में गांधी जी का साथ देने वाले नेता के रूप में जाने जाते हैं और 1926-27 में कांग्रेस के अध्यक्ष रहे डॉक्टर मुख़्तार अहमद अंसारी थे.
मुख़्तार अंसारी के नाना ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान को 1947 की लड़ाई में शहादत के लिए महावीर चक्र से नवाज़ा गया था.
ग़ाज़ीपुर में साफ़-सुथरी छवि रखने वाले और कम्युनिस्ट बैकग्राउंड से आने वाले मुख़्तार के पिता सुभानउल्ला अंसारी स्थानीय राजनीति में सक्रिय थे. भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी रिश्ते में मुख़्तार अंसारी के चाचा हैं.
मुख़्तार के बड़े भाई अफ़जाल अंसारी ग़ाज़ीपुर की मोहम्मदाबाद विधानसभा से लगतार 5 बार (1985 से 1996 तक) विधायक रह चुके हैं और 2004 में ग़ाज़ीपुर से ही सांसद का चुनाव भी जीत चुके हैं.
मुख़्तार के दूसरे भाई सिबकातुल्ला अंसारी भी 2007 और 2012 के चुनाव में मोहम्मदाबाद से ही विधायक रह चुके हैं.
मुख़्तार अंसारी के दो बेटे हैं. उनके बड़े बेटे अब्बास अंसारी शॉट-गन शूटिंग के चैंपियन रह चुके हैं. 2017 के चुनाव में मऊ ज़िले की ही घोसी विधानसभा सीट से अब्बास ने बसपा के टिकट पर अपना पहला चुनाव लड़ा था और 7 हज़ार वोटों से अंतर से हार गए थे.
मुख़्तार के छोटे बेटे उमर अंसारी भारत के बाहर पढ़ाई कर रहे हैं लेकिन पिछले विधानसभा चुनाव में वह भी पहली बार राजनीति में उतरे अपने पिता के पक्ष में मऊ के उनका चुनावी कैम्पेन चलाया.
ऐसे परिवार से आने वाले मुख़्तार का आपराधिक मुक़दमों से लदे माफ़िया नेता में तब्दील होना ग़ाज़ीपुर के अनेक विरोधाभासों का ही एक विस्तार लगता है.
Tuesday, February 5, 2019
पोप फ्रांसिस ने माना- पादरियों ने बनाया ननों को सेक्स ग़ुलाम
मध्य पूर्व का दौरा कर रहे पोप फ्रांसिस ने पादरियों की ओर से ननों का यौन उत्पीड़न किए जाने की बात मानी है. उनके मुताबिक इनमें से एक मामला ऐसा भी था, जहां ननों को सेक्स ग़ुलाम बनाकर रखा गया.
पोप फ्रांसिस ने ये भी माना है कि उनके पूर्ववर्ती पोप बेनडिक्ट को ऐसी ननों की पूरी धर्मसभा को ही बंद करना पड़ा था, जिनका पादरी शोषण कर रहे थे.
माना जा रहा है कि ये पहला मौका है जब पोप फ्रांसिस ने पादरियों की ओर से ननों के यौन शोषण की बात मानी है.
पोप फ्रांसिस ने कहा है कि चर्च इस समस्या के समाधान की कोशिश में जुटी है लेकिन ये दिक्कत 'अब भी बरकरार है'.
पोप फ्रांसिस फिलहाल मध्य पूर्व के ऐतिहासिक दौरे पर हैं. उन्होंने मंगलवार को पत्रकारों के सवालों के जवाब में ननों के यौन शोषण को लेकर बातें साझा कीं.
पोप ने कहा कि इस दिक्कत को लेकर कई पादरियों को निलंबित भी किया गया है लेकिन आगे भी प्रयास किए जाने जरूरी हैं.
पोप माना कि पादरी और बिशप ननों का शोषण करते रहे हैं. पोप ने कहा कि चर्च इस बात से वाकिफ है और 'इस पर काम कर रही है.'
पोप ने कहा, "हम इस रास्ते पर आगे बढ़ रहे हैं."
उन्होंने कहा, "पोप बेनडिक्ट ने महिलाओं की एक सभा को भंग करने का साहस दिखाया क्योंकि पादरियों या संस्थापकों ने वहां महिलाओं को दास बना रखा था. यहां तक कि उन्हें सेक्स ग़ुलाम तक बना दिया गया था."
पोप फ्रांसिस ने कहा कि ये समस्या लगातार बनी हुई है लेकिन बड़े पैमाने पर 'ऐसा खास धर्मसभाओं और खास क्षेत्रों में ही होता है.'
बीते साल नवंबर में कैथोलिक चर्च ग्लोबल ऑर्गेनाइजेशन फॉर नन्स ने 'चुप रहने और गोपनीयता बरतने की परंपरा' की निंदा की थी जो उन्हें अपनी बात उठाने से रोकती है.
कुछ दिन पहले वेटिकन की महिलाओं की पत्रिका वूमेन चर्च वर्ल्ड ने शोषण की निंदा करते हुए कहा था कि कुछ मामलों में नन पादरियों के गर्भ में पल रहे बच्चों का गर्भपात कराने को मजबूर हुईं. जबकि कैथोलिकों के लिए गर्भपात कराने की मनाही है.
पोप फ्रांसिस ने ये भी माना है कि उनके पूर्ववर्ती पोप बेनडिक्ट को ऐसी ननों की पूरी धर्मसभा को ही बंद करना पड़ा था, जिनका पादरी शोषण कर रहे थे.
माना जा रहा है कि ये पहला मौका है जब पोप फ्रांसिस ने पादरियों की ओर से ननों के यौन शोषण की बात मानी है.
पोप फ्रांसिस ने कहा है कि चर्च इस समस्या के समाधान की कोशिश में जुटी है लेकिन ये दिक्कत 'अब भी बरकरार है'.
पोप फ्रांसिस फिलहाल मध्य पूर्व के ऐतिहासिक दौरे पर हैं. उन्होंने मंगलवार को पत्रकारों के सवालों के जवाब में ननों के यौन शोषण को लेकर बातें साझा कीं.
पोप ने कहा कि इस दिक्कत को लेकर कई पादरियों को निलंबित भी किया गया है लेकिन आगे भी प्रयास किए जाने जरूरी हैं.
पोप माना कि पादरी और बिशप ननों का शोषण करते रहे हैं. पोप ने कहा कि चर्च इस बात से वाकिफ है और 'इस पर काम कर रही है.'
पोप ने कहा, "हम इस रास्ते पर आगे बढ़ रहे हैं."
उन्होंने कहा, "पोप बेनडिक्ट ने महिलाओं की एक सभा को भंग करने का साहस दिखाया क्योंकि पादरियों या संस्थापकों ने वहां महिलाओं को दास बना रखा था. यहां तक कि उन्हें सेक्स ग़ुलाम तक बना दिया गया था."
पोप फ्रांसिस ने कहा कि ये समस्या लगातार बनी हुई है लेकिन बड़े पैमाने पर 'ऐसा खास धर्मसभाओं और खास क्षेत्रों में ही होता है.'
बीते साल नवंबर में कैथोलिक चर्च ग्लोबल ऑर्गेनाइजेशन फॉर नन्स ने 'चुप रहने और गोपनीयता बरतने की परंपरा' की निंदा की थी जो उन्हें अपनी बात उठाने से रोकती है.
कुछ दिन पहले वेटिकन की महिलाओं की पत्रिका वूमेन चर्च वर्ल्ड ने शोषण की निंदा करते हुए कहा था कि कुछ मामलों में नन पादरियों के गर्भ में पल रहे बच्चों का गर्भपात कराने को मजबूर हुईं. जबकि कैथोलिकों के लिए गर्भपात कराने की मनाही है.
Sunday, February 3, 2019
अमरीका ने जानबूझकर बनाई फ़र्ज़ी यूनिवर्सिटी और पकड़े गए 129 भारतीय
भारत ने अमरीका में फ़र्ज़ी यूनिवर्सिटी में नामांकन को लेकर 129 भारतीय छात्रों की गिरफ़्तारी पर राजनयिक विरोध दर्ज कराया है.
अमरीका के मिशिगन राज्य में यूनिवर्सिटी ऑफ फ़ार्मिंग्टन का विज्ञापन दिया गया था. इस यूनिवर्सिटी को अमरीकी सुरक्षा बलों के अंडरकवर एजेंट चला रहे थे ताकि पैसे के बदले अवैध प्रवास की चाहत रखने वालों को पकड़ा जा सके.
अमरीकी अधिकारियों का कहना है कि जिन लोगों ने यहां प्रवेश लिया था उन्हें पता था कि यह अवैध हो सकता है.
हालांकि भारतीय अधिकारियों का कहना है कि संभव है कि भारतीय छात्र ठगी के शिकार हो गए हों.
शनिवार को भारतीय विदेश मंत्रालय ने दिल्ली स्थित अमरीकी दूतावास में इस मामले में विरोध जताया था और छात्रों को क़ानूनी मदद मुहैया कराने की मांग की थी.
भारतीय विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा है, ''हमारी चिंता है कि भारतीय छात्रों के साथ ठीक के व्यवहार हो और उन तक भारतीय अधिकारियों की पहुंच संभव हो ताकि क़ानूनी मदद मुहैया कराई जा सके.
यह फ़र्ज़ी यूनिवर्सिटी 2015 से चलाई जा रही है. अमरीकी मीडिया का कहना है कि यह यूनिवर्सिटी उन विदेशी नागरिकों को आकर्षित करने के लिए थी जो अमरीका के स्टूडेंट वीज़ा पर यहां पहुंचते थे और यहां रहना चाहते थे.
इस यूनिवर्सिटी के लिए एक वेबसाइट भी थी. इस वेबसाइट पर क्लासरूम और लाइब्रेरी में स्टूडेंट्स की तस्वीरें हैं. कुछ ऐसी तस्वीरें भी हैं जिनमें छात्र कैंपस में आपस में बातें कर रहे हैं.
इसके विज्ञापन में बताया गया है कि अंडरग्रैजुएट के लिए एक साल की फीस 8,500 डॉलर (6 लाख सात हज़ार रुपए) और ग्रैजुएशन के लिए 11,000 डॉलर (7 लाख 86 हज़ार रुपए) है.
इस यूनिवर्सिटी का एक फ़र्ज़ी फ़ेसबुक पेज भी है. हालांकि पिछले हफ़्ते अदालत से जो दस्तावेज सामने आए हैं उनसे पता चलता है कि इस यूनिवर्सिटी में काम करने वाले लोग अमरीका के इमिग्रेशन और कस्टम्स एन्फ़ोर्समेंट एजेंसी (आईसीई) के अंडरकवर एजेंट थे. मिशिगन के डेट्रॉइट में एक बिज़नेस पार्क इस यूनिवर्सिटी का कैंपस है.
मिशिगन के डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में जो आरोपपत्र दाख़िल किया गया है, उसमें कहा गया है कि छात्रों को पता था कि यह सब कुछ फ़र्ज़ी है. अभियोजकों का कहना है कि यूनिवर्सिटी का इस्तेमाल पैसे के बदले अमरीका में रहने देने की स्कीम के तौर पर इस्तेमाल किया गया.
यह स्कीम वैसे लोगों की पड़ताल करने के लिए थी जो अमरीका में वैध तरीक़े से आते हैं लेकिन यहां रहने और काम करने के लिए ग़लत तरीक़े से ज़्यादा समय तक रहने की कोशिश करते हैं.
इस मामले कुल 130 स्टूडेंट पकड़े गए हैं, जिनमें से 129 भारतीय हैं. डिट्रॉइट फ़्री प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार इन्हें इसी हफ़्ते बुधवार को सिविल इमिग्रेशन के आरोप में गिरफ़्तार किया गया है.
अगर इन्हें दोषी पाया जाता है कि निर्वासन की सज़ा मिलेगी. कहा जा रहा है कि आठ लोगों पर यूनिवर्सिटी में नामांकन दिलाने में मदद करने का आरोप है. यह आरोप फ़ायदे के लिए वीज़ा धोखाधड़ी के अंतर्गत आएगा.
भारत का कहना है कि संभव है कि स्टूडेंट के साथ धोखाधड़ी हुई हो. भारतीय विदेश मंत्रालय का कहना है कि उसने अमरीका से पूरे मामले की विस्तृत जानकारी साझा करने का आग्रह किया है.
अमरीका के भी कुछ इमिग्रेशन वक़ीलों का कहना है कि कई बार बेगुनाह विदेशी भी सरकार के बिछाए जाल में फंस जाते हैं.
अटलांटा के इमिग्रेशन अटॉर्नी रवि मन्नान ने डिट्रॉइट फ़्री प्रेस से कहा है कि इस तरह की स्टिंग में जैसे वादे किए जाते हैं, उनमें लोग फंस जाते हैं.
वॉशिंगटन स्थित भारतीय दूतावास ने इस मामले में एक हेल्पलाइन नंबर दिया है जिस पर फ़ोन कर छात्रों के परिजन अपनी चिंता जता रहे हैं.
नई दिल्ली स्थिति अमरीकी दूतावास ने भी इस बात की पुष्टि की है कि भारत ने इस मामले में विरोध दर्ज कराया है. हालांकि इसकी पुष्टि के अलावा कोई और जानकारी नहीं दी गई है.
अमरीकी इमिग्रेशन से जुड़े अधिकारियों ने हाल के वर्षों में अवैध प्रवासियों का पता लगाने के लिए कई रणनीतियों पर काम किया है. 2016 में ओबामा के शासनकाल में उत्तरी न्यू जर्सी में भी एक फ़र्ज़ी यूनिवर्सिटी बनाई गई थी.
इसमें कुल 21 लोग गिरफ़्तार किए गए थे. इनमें से ज़्यादातर लोग भारत और चीन के थे. ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद से अवैध प्रवासियों पर और सख़्ती बढ़ गई है. पिछले साल दो बड़ी कार्रवाई हुई थी और आईसीई अधिकारियों ने लगभग 300 लोगों को गिरफ़्तार किया था.
अमरीका के मिशिगन राज्य में यूनिवर्सिटी ऑफ फ़ार्मिंग्टन का विज्ञापन दिया गया था. इस यूनिवर्सिटी को अमरीकी सुरक्षा बलों के अंडरकवर एजेंट चला रहे थे ताकि पैसे के बदले अवैध प्रवास की चाहत रखने वालों को पकड़ा जा सके.
अमरीकी अधिकारियों का कहना है कि जिन लोगों ने यहां प्रवेश लिया था उन्हें पता था कि यह अवैध हो सकता है.
हालांकि भारतीय अधिकारियों का कहना है कि संभव है कि भारतीय छात्र ठगी के शिकार हो गए हों.
शनिवार को भारतीय विदेश मंत्रालय ने दिल्ली स्थित अमरीकी दूतावास में इस मामले में विरोध जताया था और छात्रों को क़ानूनी मदद मुहैया कराने की मांग की थी.
भारतीय विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा है, ''हमारी चिंता है कि भारतीय छात्रों के साथ ठीक के व्यवहार हो और उन तक भारतीय अधिकारियों की पहुंच संभव हो ताकि क़ानूनी मदद मुहैया कराई जा सके.
यह फ़र्ज़ी यूनिवर्सिटी 2015 से चलाई जा रही है. अमरीकी मीडिया का कहना है कि यह यूनिवर्सिटी उन विदेशी नागरिकों को आकर्षित करने के लिए थी जो अमरीका के स्टूडेंट वीज़ा पर यहां पहुंचते थे और यहां रहना चाहते थे.
इस यूनिवर्सिटी के लिए एक वेबसाइट भी थी. इस वेबसाइट पर क्लासरूम और लाइब्रेरी में स्टूडेंट्स की तस्वीरें हैं. कुछ ऐसी तस्वीरें भी हैं जिनमें छात्र कैंपस में आपस में बातें कर रहे हैं.
इसके विज्ञापन में बताया गया है कि अंडरग्रैजुएट के लिए एक साल की फीस 8,500 डॉलर (6 लाख सात हज़ार रुपए) और ग्रैजुएशन के लिए 11,000 डॉलर (7 लाख 86 हज़ार रुपए) है.
इस यूनिवर्सिटी का एक फ़र्ज़ी फ़ेसबुक पेज भी है. हालांकि पिछले हफ़्ते अदालत से जो दस्तावेज सामने आए हैं उनसे पता चलता है कि इस यूनिवर्सिटी में काम करने वाले लोग अमरीका के इमिग्रेशन और कस्टम्स एन्फ़ोर्समेंट एजेंसी (आईसीई) के अंडरकवर एजेंट थे. मिशिगन के डेट्रॉइट में एक बिज़नेस पार्क इस यूनिवर्सिटी का कैंपस है.
मिशिगन के डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में जो आरोपपत्र दाख़िल किया गया है, उसमें कहा गया है कि छात्रों को पता था कि यह सब कुछ फ़र्ज़ी है. अभियोजकों का कहना है कि यूनिवर्सिटी का इस्तेमाल पैसे के बदले अमरीका में रहने देने की स्कीम के तौर पर इस्तेमाल किया गया.
यह स्कीम वैसे लोगों की पड़ताल करने के लिए थी जो अमरीका में वैध तरीक़े से आते हैं लेकिन यहां रहने और काम करने के लिए ग़लत तरीक़े से ज़्यादा समय तक रहने की कोशिश करते हैं.
इस मामले कुल 130 स्टूडेंट पकड़े गए हैं, जिनमें से 129 भारतीय हैं. डिट्रॉइट फ़्री प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार इन्हें इसी हफ़्ते बुधवार को सिविल इमिग्रेशन के आरोप में गिरफ़्तार किया गया है.
अगर इन्हें दोषी पाया जाता है कि निर्वासन की सज़ा मिलेगी. कहा जा रहा है कि आठ लोगों पर यूनिवर्सिटी में नामांकन दिलाने में मदद करने का आरोप है. यह आरोप फ़ायदे के लिए वीज़ा धोखाधड़ी के अंतर्गत आएगा.
भारत का कहना है कि संभव है कि स्टूडेंट के साथ धोखाधड़ी हुई हो. भारतीय विदेश मंत्रालय का कहना है कि उसने अमरीका से पूरे मामले की विस्तृत जानकारी साझा करने का आग्रह किया है.
अमरीका के भी कुछ इमिग्रेशन वक़ीलों का कहना है कि कई बार बेगुनाह विदेशी भी सरकार के बिछाए जाल में फंस जाते हैं.
अटलांटा के इमिग्रेशन अटॉर्नी रवि मन्नान ने डिट्रॉइट फ़्री प्रेस से कहा है कि इस तरह की स्टिंग में जैसे वादे किए जाते हैं, उनमें लोग फंस जाते हैं.
वॉशिंगटन स्थित भारतीय दूतावास ने इस मामले में एक हेल्पलाइन नंबर दिया है जिस पर फ़ोन कर छात्रों के परिजन अपनी चिंता जता रहे हैं.
नई दिल्ली स्थिति अमरीकी दूतावास ने भी इस बात की पुष्टि की है कि भारत ने इस मामले में विरोध दर्ज कराया है. हालांकि इसकी पुष्टि के अलावा कोई और जानकारी नहीं दी गई है.
अमरीकी इमिग्रेशन से जुड़े अधिकारियों ने हाल के वर्षों में अवैध प्रवासियों का पता लगाने के लिए कई रणनीतियों पर काम किया है. 2016 में ओबामा के शासनकाल में उत्तरी न्यू जर्सी में भी एक फ़र्ज़ी यूनिवर्सिटी बनाई गई थी.
इसमें कुल 21 लोग गिरफ़्तार किए गए थे. इनमें से ज़्यादातर लोग भारत और चीन के थे. ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद से अवैध प्रवासियों पर और सख़्ती बढ़ गई है. पिछले साल दो बड़ी कार्रवाई हुई थी और आईसीई अधिकारियों ने लगभग 300 लोगों को गिरफ़्तार किया था.
Friday, February 1, 2019
रेल और रक्षा को अब तक का सबसे ज्यादा आवंटन, कुल बजट 27.84 लाख करोड़ रु. का
मोदी सरकार ने अंतरिम बजट में रक्षा क्षेत्र के लिए पहली बार तीन लाख करोड़ से ज्यादा का प्रावधान किया। इसी तरह रेलवे के विकास कार्यों के लिए सबसे ज्यादा 1.58 लाख करोड़ रुपए आवंटित किए हैं। पिछले बजट में यह रकम 1.48 लाख करोड़ थी। रेल किराये में कोई वृद्धि नहीं की गई। सरकार ने इस बार कुल 27.84 लाख करोड़ का बजट पेश किया है।
वित्त मंत्री गोयल ने बजट भाषण में कहा कि बीते तीन सालों में ओआरओपी के लिए 35 हजार करोड़ रुपए दिए गए। 2019-20 में रेलवे के विकास कार्यों के लिए 1.58 लाख करोड़ का प्रावधान सरकार ने किया है। पिछले साल यह रकम 1.48 लाख करोड़ रुपए थी।
पहली बार रेलवे के नक्शे पर आए पूर्वोत्तर के तीन राज्य
गोयल ने कहा, ''पिछला साल रेलवे से लिए सबसे सुरक्षित रहा। ब्रॉडगैज नेटवर्क पर सभी मानवरहित क्रॉसिंग खत्म की जा चुकी हैं। देश में विकसित हुई सेमी हाईस्पीड ट्रेन वंदे भारत एक्सप्रेस लोगों को विश्व स्तरीय सफर का एहसास कराएगी। मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम पहली बार रेलवे के नक्शे पर आए।'' इससे पहले रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा ने कहा कि सरकार ने रेलवे में सीसीटीवी और वाईफाई जैसे इन्वेस्टमेंट किए हैं। धीरे-धीरे रेलवे में ऐसी सुविधाओं को बढ़ाया जाएगा।
यहां शुक्रवार को एक ट्रेनी लड़ाकू विमान मिराज-2000 दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इसमें 2 पायलटों की मौत हो गई। हादसा शुक्रवार सुबह बेंगलुरु के हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) एयरपोर्ट पर हुआ। प्लेन में दो ही पायलट सवार थे। हादसे के वक्त दोनों प्लेन से बाहर निकल गए थे। एक पायलट की मौत प्लेन के मलबे पर गिरने से हो गई, जबकि दूसरे ने अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।
रक्षा विभाग के प्रवक्ता ने कहा, जांच के आदेश दे दिए गए हैं। फिलहाल हादसे के सही कारणों का पता नहीं चल सका है। मृतक पायलटों की पहचान समीर एब्रोल और सिध्दार्थ नेगी के रूप में की गई। दोनों विमान और सिस्टम परीक्षण संस्थान में स्कॉर्डन लीडर थे।
एयरफोर्स का जगुआर प्लेन क्रैश
28 जनवरी 2019 को उत्तरप्रदेश के कुशीनगर के खेतिमपुर में एयरफोर्स का जगुआर प्लेन क्रैश हुआ था। हादसे के बाद प्लेन में आग लग गई थी। हालांकि, विमान के पायलट ने पैराशूट के जरिए अपनी जान बचा ली थी। ये सुपर सोनिक विमान जगुआर फ्रांस में बना था, जो कम ऊंचाई पर उड़ने में सक्षम है और दूर तक मार कर सकता है।
गुजरात में भी हुआ था हादसा
गुजरात के कच्छ में पिछले साल 5 जून को भारतीय वायुसेना का जगुआर एयरक्राफ्ट दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इस हादसे में एयर कमोडोर रैंक के अफसर संजय चौहान शहीद हो गए थे। बताया गया था कि एयरक्राफ्ट ने रुटीन ट्रेनिंग के लिए जामनगर से उड़ान भरी थी।
लोकसभा चुनाव से ठीक पहले केंद्र की मोदी सरकार ने अपना अंतरिम बजट पेश किया. कार्यवाहक वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने जब सुबह 11 बजे अपना बजट भाषण पढ़ना शुरू किया, तो उनके पिटारे से हर किसी के लिए तोहफे निकले. किसान, महिला, टैक्स पेयर, युवा, मजदूर पीयूष गोयल ने हर किसी की झोली भर दी. शुरू में तो टैक्स पेयर के लिए कोई ऐलान नहीं किया गया था, लेकिन भाषण के अंत में पीयूष गोयल ने जैसे ही ऐलान किया कि अब 5 लाख रुपये तक सालाना कमाने वाले टैक्सपेयर को कोई टैक्स नहीं देना होगा तो मिडिल क्लास की खुशी का ठिकाना नहीं रहा.
मोदी सरकार के इस अंतरिम बजट को चुनावी सौगातों की बौछार के तौर पर भी देखा जा रहा है. कांग्रेस शासित प्रदेश में जिस तरह कर्जमाफी की गई उस लिहाज से मोदी सरकार ने किसानों की जेब में सीधा कैश पहुंचाने का ऐलान किया. इस बजट में किसके लिए क्या खास है, यहां पढ़ें...
वित्त मंत्री गोयल ने बजट भाषण में कहा कि बीते तीन सालों में ओआरओपी के लिए 35 हजार करोड़ रुपए दिए गए। 2019-20 में रेलवे के विकास कार्यों के लिए 1.58 लाख करोड़ का प्रावधान सरकार ने किया है। पिछले साल यह रकम 1.48 लाख करोड़ रुपए थी।
पहली बार रेलवे के नक्शे पर आए पूर्वोत्तर के तीन राज्य
गोयल ने कहा, ''पिछला साल रेलवे से लिए सबसे सुरक्षित रहा। ब्रॉडगैज नेटवर्क पर सभी मानवरहित क्रॉसिंग खत्म की जा चुकी हैं। देश में विकसित हुई सेमी हाईस्पीड ट्रेन वंदे भारत एक्सप्रेस लोगों को विश्व स्तरीय सफर का एहसास कराएगी। मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम पहली बार रेलवे के नक्शे पर आए।'' इससे पहले रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा ने कहा कि सरकार ने रेलवे में सीसीटीवी और वाईफाई जैसे इन्वेस्टमेंट किए हैं। धीरे-धीरे रेलवे में ऐसी सुविधाओं को बढ़ाया जाएगा।
यहां शुक्रवार को एक ट्रेनी लड़ाकू विमान मिराज-2000 दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इसमें 2 पायलटों की मौत हो गई। हादसा शुक्रवार सुबह बेंगलुरु के हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) एयरपोर्ट पर हुआ। प्लेन में दो ही पायलट सवार थे। हादसे के वक्त दोनों प्लेन से बाहर निकल गए थे। एक पायलट की मौत प्लेन के मलबे पर गिरने से हो गई, जबकि दूसरे ने अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।
रक्षा विभाग के प्रवक्ता ने कहा, जांच के आदेश दे दिए गए हैं। फिलहाल हादसे के सही कारणों का पता नहीं चल सका है। मृतक पायलटों की पहचान समीर एब्रोल और सिध्दार्थ नेगी के रूप में की गई। दोनों विमान और सिस्टम परीक्षण संस्थान में स्कॉर्डन लीडर थे।
एयरफोर्स का जगुआर प्लेन क्रैश
28 जनवरी 2019 को उत्तरप्रदेश के कुशीनगर के खेतिमपुर में एयरफोर्स का जगुआर प्लेन क्रैश हुआ था। हादसे के बाद प्लेन में आग लग गई थी। हालांकि, विमान के पायलट ने पैराशूट के जरिए अपनी जान बचा ली थी। ये सुपर सोनिक विमान जगुआर फ्रांस में बना था, जो कम ऊंचाई पर उड़ने में सक्षम है और दूर तक मार कर सकता है।
गुजरात में भी हुआ था हादसा
गुजरात के कच्छ में पिछले साल 5 जून को भारतीय वायुसेना का जगुआर एयरक्राफ्ट दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इस हादसे में एयर कमोडोर रैंक के अफसर संजय चौहान शहीद हो गए थे। बताया गया था कि एयरक्राफ्ट ने रुटीन ट्रेनिंग के लिए जामनगर से उड़ान भरी थी।
लोकसभा चुनाव से ठीक पहले केंद्र की मोदी सरकार ने अपना अंतरिम बजट पेश किया. कार्यवाहक वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने जब सुबह 11 बजे अपना बजट भाषण पढ़ना शुरू किया, तो उनके पिटारे से हर किसी के लिए तोहफे निकले. किसान, महिला, टैक्स पेयर, युवा, मजदूर पीयूष गोयल ने हर किसी की झोली भर दी. शुरू में तो टैक्स पेयर के लिए कोई ऐलान नहीं किया गया था, लेकिन भाषण के अंत में पीयूष गोयल ने जैसे ही ऐलान किया कि अब 5 लाख रुपये तक सालाना कमाने वाले टैक्सपेयर को कोई टैक्स नहीं देना होगा तो मिडिल क्लास की खुशी का ठिकाना नहीं रहा.
मोदी सरकार के इस अंतरिम बजट को चुनावी सौगातों की बौछार के तौर पर भी देखा जा रहा है. कांग्रेस शासित प्रदेश में जिस तरह कर्जमाफी की गई उस लिहाज से मोदी सरकार ने किसानों की जेब में सीधा कैश पहुंचाने का ऐलान किया. इस बजट में किसके लिए क्या खास है, यहां पढ़ें...
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