Friday, March 15, 2019

क्रिकेटर श्रीसंत ने कहा- सुप्रीम कोर्ट ने मुझे दी लाइफ़ लाइन

क्रिकेटर श्रीसंत ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें 'लाइफ लाइन' दी है वो जल्दी से जल्दी क्रिकेट मैदान पर वापसी करना चाहते हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने मैच फिक्सिंग मामले में बीसीसीआई की अनुशासन समिति की ओर से श्रीसंत पर लगाई गई आजीवन पाबंदी शुक्रवार को हटा दी.

केरल हाई कोर्ट ने श्रीसंत पर लगाए गए आजीवन प्रतिबंध को बरकरार रखा था. श्रीसंत ने हाई कोर्ट के फ़ैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी.

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस अशोक भूषण और केएम जोसेफ की बैंच ने कहा है कि बीसीसीआई की अनुशासन समिति तीन महीने के दौरान श्रीसंत को दी गई सज़ा पर दोबारा विचार कर सकती है.

कोर्ट ने ये भी साफ़ किया कि सज़ा की अविधि तय करते वक्त समिति को श्रीसंत का पक्ष भी सुनना होगा.

श्रीसंत ने सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले पर खुशी जाहिर करते हुए कहा, " लाइफ बैन हटना बहुत अच्छी बात है. सुप्रीम कोर्ट ने अच्छा लाइफ लाइन दिया है. अच्छा है कि मुझे एक अवसर दिया है. मैं पूरी तरह से फिट हूं. क्रिकेट मेरी रोजी रोटी है. मैं वापस खेलना चाहता हूं."

सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा कि इस फ़ैसले का दिल्ली हाई कोर्ट में लंबित आपराधिक मामले पर कोई असर नहीं होगा. हाई कोर्ट में दिल्ली पुलिस ने निचली अदालत के फ़ैसले के चुनौती दी है. इस फ़ैसले में कोर्ट ने साल 2013 के आईपीएल स्पॉट फिक्सिंग के मामले में श्रीसंत समेत सभी अभियुक्तों को बरी कर दिया था.

श्रीसंत साल 2007 में वर्ल्ड ट्वेंटी-20 और साल 2011 में वनडे वर्ल्ड कप जीतने वाली टीम के सदस्य रहे हैं.

इस बारे में पाकिस्तानी वायु सेना ने आधिकारिक तौर पर तो कुछ नहीं कहा लेकिन पाकिस्तानी मीडिया की रिपोर्टों से पता चलता है कि इस कार्रवाई में पाकिस्तान ने चीन के सहयोग से बने स्वदेशी लड़ाकू विमान जेएफ़-17 थंडर का इस्तेमाल किया था.

ख़तरनाक और अहम बात ये है कि भारत के एसयू-30 और पाकिस्तान के जेएफ़-थंडर, ये दोनों ही लड़ाकू विमान परमाणु हथियार ले जाने की क्षमता रखते हैं. दोनों ही देशों की वायु सेनाओं के पास ये क्षमता नहीं है कि तुरंत इस बात का पता कर लें कि हमलावर लड़ाकू विमान परमाणु हथियारों से लैस है या नहीं.

जब रडार किसी हमलावर विमान का पता लगाएगा तो ये ही माना जाएगा कि वो अपने साथ परमाणु हथियार भी ला रहा होगा. दोनों ही देशों की वायु सेनाएं हमलावर लड़ाकू विमान के बारे में यही शक करेंगी.

ठीक इसी तरह पाकिस्तानी सेना के लिए भी ये जान लेना संभव नहीं है कि उसके ख़िलाफ़ दाग़े जाने वाले मिज़ाइल पारपंरिक हथियारों से लैस हैं या परमाणु हथियारों से. जैसा कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने अपने भाषण में बताया था कि उनके पास इंडिया जैसी रिपोर्ट थी कि नियंत्रण रेखा के पास बहावलपुर सेक्टर में जैश-ए-मोहम्मद को नुक़सान पहुंचाने के लिए मिसाइल से हमला होना था. इसी तरह की जानकारी कई अन्य सूत्रों के हवाले से भी सामने आई थी.

पाकिस्तान और भारत की सेनाएं किसी दाग़े गए मिसाइल का पता तब ही लगा सकती हैं जब वो उनकी अपनी सरहद में दाख़िल हो जाए. रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इस स्थिति में मिसाइल को ख़त्म करने के लिए देश के पास सिर्फ़ चार मिनट का ही समय होता है.

पाकिस्तानी अधिकारियों के मुताबिक इतिहास में जब भी सैन्य तनाव या जंगी माहौल पैदा हुआ तब वो तुरंत ही आख़िरी हदों तक नहीं पहुंचा था बल्कि तनाव धीरे-धीरे बढ़ा था. लेकिन इस बार हालात बिलकुल अलग थे जिसमें दोनों ही सेनाएं शुरुआत में ही आख़िरी विकल्पों तक पहुंच गईं.

भारत के बयान पर यक़ीन करती है दुनिया

पाकिस्तान ने इन हालात से अपने लिए दूसरा सबक ये सीखा है कि तनाव के दौरान दुनिया भारत की इस मांग पर सहमत होती नज़र आती है कि पाकिस्तान अपनी ज़मीन से आतंकवादियों के नेटवर्क को ख़त्म करे.

भारत प्रतिबंधित संगठनों की सूची में शामिल जैश-ए-मोहम्मद और जमात-उद-दावा के ख़िलाफ़ पाकिस्तानी सरकार की ओर से की गई हालिया कार्रवाइयों को महज़ अंतरराष्ट्रीय दबाव का नतीजा ही मानता है.

एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी के मुताबिक पाकिस्तान के नीति निर्माताओं को इस हक़ीक़त को समझने की ज़रूरत है कि सरकार के ढांचे से बाहर से काम करने वाले संगठनों (नॉन स्टेट एक्टर्स) की वजह से पाकिस्तान की कोशिशों का वो फल भी ज़ाया हो सकता है जो उसने बड़ी महेनत से दहशतगर्दी के ख़ात्मे की ज़द्दोजहद में हासिल किया है.

भारत के लड़ाकू विमानों के पाकिस्तान के वायुक्षेत्र का उल्लंघन करने पर पाकिस्तान के क़रीबी दोस्त भी इस बार खुल कर सामने नहीं आए. इन हालातों ने पाकिस्तानी सरकार और सेना को तेज़ी से कार्रवाई पर आमदा किया कि ऐसे तत्व उनकी उस मेहनत पर भी पानी फेर रहे हैं जो पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने पाकिस्तान के अलग अलग संगठनों के ख़िलाफ़ की थी.

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