Wednesday, January 23, 2019

प्रियंका गांधी के बारे में कितना जानते हैं आप

साल 1988. इंदिरा गांधी की हत्या को चार साल बीत चुके थे. तभी एक मंच पर लोगों ने प्रियंका गांधी को देखा.

प्रियंका की उम्र तब सिर्फ़ 16 साल थी. ये प्रियंका का पहला सार्वजनिक भाषण था. इस भाषण के 31 साल बाद कांग्रेस समर्थक अक्सर जिस मांग को उठाते रहे थे, वो अब पूरी हो गई है.

कांग्रेस ने प्रियंका गांधी को महासचिव बनाकर पूर्वी उत्तर प्रदेश की ज़िम्मेदारी दी है.

हालांकि 2014 आम चुनावों से पहले भी ये माना जा रहा था कि प्रियंका वाराणसी से चुनाव लड़ना चाहती थीं.

लेकिन मोदी के ख़िलाफ़ लड़ने के जोखिम को देखते हुए इस फ़ैसले पर मुहर नहीं लग पाई.

बीते साल सोनिया गांधी से जब प्रियंका के राजनीति में आने की बात पूछी गई थी, तब उन्होंने कहा था कि ये प्रियंका तय करेंगी कि वो राजनीति में कब आना चाहती हैं.

प्रियंका गांधी जब छोटी थीं और अपने पिता राजीव और सोनिया के साथ रायबरेली जाती थीं तो उनके बाल हमेशा छोटे रहते थे.

अमेठी और रायबरेली के दौरे पर गांव के लोग राहुल की तरह प्रियंका को भी भइया बुलाते थे. अगले कुछ सालों में ये बदलकर भइया जी हो गया.

यूपी में प्रियंका की लोकप्रियता को आप यूं भी समझ सकते हैं कि आम लोग उन्हें काफ़ी पसंद करते हैं.

इसकी एक वजह प्रियंका का हेयरस्टाइल, कपड़ों के चयन और बात करने के सलीके में इंदिरा गांधी की छाप का साफ नज़र आना.

प्रियंका जब यूपी के दौरे पर रहती हैं तो उनका दिन सुबह छह बजे शुरू होता है. ट्रेडमिल पर थोड़ी मशक्कत करने के बाद प्रियंका योग करती हैं.

बताया जाता है कि प्रियंका यूपी दौरे पर जब रहती हैं तो रोटी या परांठे के साथ सब्ज़ी और दाल खाना पसंद करती हैं. साथ में आम/नींबू के अचार के साथ.

रमेश ने बीबीसी को इस बारे में 2016 में बताया था, "प्रियंका प्रचार करने अकेले निकलतीं थी और देर रात लौट पातीं थीं. दोनों बच्चे घर में आया के साथ रहते थे. एक दिन वे जल्दी लौट आईं और मुझसे बोलीं बच्चों को रिक्शे की सैर करानी है इसलिए दो रिक्शे मिल सकते हैं क्या?"

"जैसे ही रिक्शे आए वे बच्चों के साथ एक पर बैठ कर बाहर निकल चलीं और भौचक्के एसपीजी वाले पीछे भागे. आधे घंटे बाद वे लौटीं और रिक्शा वालों को 50 रुपए का नोट देकर हँसते हुए भीतर लौट आईं."

24 अकबर रोड किताब लिखने वाले रशीद किदवई ने प्रियंका की कांग्रेस में ज़रूरत की एक दिलचस्प कहानी बताते हैं.

साल 2004 के आम चुनाव के समय ये महसूस किया गया कि कांग्रेस की हालत ख़राब है. पार्टी ने एक प्रोफ़ेशनल एजेंसी की सेवाएं लीं जिसने तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को बताया कि वह अकेले बीजेपी के बड़े नेता और तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को टक्कर नहीं दे सकती.

इसके बाद ही राहुल गांधी ब्रिटेन में अपनी नौकरी छोड़कर सक्रिय राजनीति में आए.

इन चुनावों के बाद जब नतीजे आने शुरू हुए तो अमेठी में टीवी देख रहीं प्रियंका के चेहरे की मुस्कुराहट हर 10 मिनट में बढ़ रही थी.

Tuesday, January 15, 2019

कर्नाटक में ऑपरेशन लोटस 3.0 शुरू, अब क्या होगा?

भारतीय जनता पार्टी कर्नाटक में जनता दल सेक्युलर (जेडीएस) और कांग्रेस की गठबंधन सरकार को तोड़ने के प्रयास पहले भी कर चुकी है. ऑपरेशन कमल 3.0 इन प्रयासों से अलग नहीं है.

कर्नाटक में हुए विधानसभा चुनावों के नतीजे 15 मई को आए थे और उस दिन के बाद से ही बीजेपी असंतुष्ट कांग्रेसी विधायकों को अपनी ओर खींचने के प्रयास करती रही है.

और असंतुष्ट कांग्रेसी विधायकों ने भी मंत्रीपद या अहम स्थान न मिलने की स्थिति में पाला बदलने की मंशा ज़ाहिर करने में कोई हिचक नहीं दिखाई है. वो रह-रह पार्टी आलाकमान को संकेत देते रहे हैं.

2008 में कर्नाटक में जब भारतीय जनता पार्टी सत्ता में आई थी तब पार्टी नेताओं ने बहुमत हासिल करने के लिए ऑपरेशन कमल की तरकीब इजाद की थी. 224 सदस्यों की विधानसभा में भाजपा को 110 सीटें मिलीं थीं. वो बहुमत से दो सीट दूर थी.

बहुमत हासिल करने के लिए बीजेपनी नेतृत्व ने तत्कालीन मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा के मार्गदर्शन में कांग्रेस और जेडीएस के विधायकों को अपनी ओर खींचा. विधायकों ने निजी कारण बताकर इस्तीफ़े दिए थे.

विधायक पद से इस्तीफ़ा देने के बाद भाजपा ने इन विधायकों को अपने टिकट दिए और ये चुनकर फिर से सदन में पहुंच गए. ऑपरेशन कमल में हिस्सा लेने वाले आठ विधायकों में से पांच ही जीतने में कामयाब रहे. बाक़ी तीन को मतदाताओं ने हरा दिया. ये ऑपरेशन कमल 1.0 था.

केंद्र में सत्ताधारी भाजपा मोदी लहर में राज्य में सत्ता तक पहुंचने के लिए आश्वस्त दिख रही थी. लेकिन ये जोश तब ठंडा पड़ गया जब रुझानों में भाजपा 108 से ऊपर का आंकड़ा नहीं पकड़ सकी और अंततः पूरे नतीजे आने तक 104 सीटों पर जाकर रुक गई.

80 विधायक लाने वाली कांग्रेस ने 37 विधायक लेकर आई जनता दल सेक्यूलर को सरकार बनाने का न्यौता देकर सबकों चौंका दिया. एचडी कुमारास्वामी को कांग्रेस ने मुख्यमंत्री बनने का प्रस्ताव दिया. दोनों पार्टियों की संख्या को मिलाकर गठबंधन के पास कुल 117 सीटें हो गईं यानी बहुमत से पांच ज्यादा.

बावजूद इसके राज्यपाल वाजूभाई वाला ने गठबंधन को नज़रअंदाज़ करके सबसे ज़्यादा सीटें लाने वाली भाजपा के येदियुरप्पा को सरकार बनाने का न्यौता दे दिया. येदियुरप्पा को बहुमत साबित करने के लिए पंद्रह दिनों का समय दिया गया. लेकिन मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा और पंद्रह दिनों का समय करके एक दिन कर दिया गया.

कांग्रेसी और जेडीएस के विधायकों को लुभाने के लिए भाजपा ने सभी प्रयास किए. सत्ता और पैसे का लालच दिया गया. एक ओर विधानसभा में विश्वास मत पर बहस शुरू हुई तो दूसरी ओर कांग्रेस ने अपने विधायकों को ख़रीदने की कोशिश के ऑडियो टेप जारी कर दिए. इनमें दावा किया गया कि कांग्रेसी विधायकों को बीजेपी के ताक़तवर नेताओं ने ख़रीदने की कोशिश की.

येदियुरप्पा ने विश्वास मत पर मतदान होने से पहले एक भावुक भाषण में अपने इस्तीफ़े की घोषणा कर दी और राजभवन की ओर चले गए. राज्यपाल ने एचडी कुमारास्वामी को सरकार बनाने और बहुमत साबित करने का न्यौता दिया.

चर्चाएं चलती रहीं कि अपने भाई रमेश जार्कीहोली को मंत्री बनाए जाने से नाराज़ सतीश जार्कीहोली पाला बदलकर बीजेपी में जा सकते हैं. लेकिन सतीश जार्कीहोली ने साफ़ कर दिया कि उनका कांग्रेस पार्टी को छोड़ने का कोई इरादा नहीं है.

बीजेपी नेता दावा करते रहे कि कांग्रेस और जेडीएस की सरकार ज़्यादा दिनों तक नहीं चल पाएगी और लोकसभा चुनावों से पहले गिर जाएगी. कांग्रेस भी मंत्री बनने की चाह रखने वालों की भावनाओं को शांत करती रही. कांग्रेसी विधायक जेडीएस के मंत्रियों के अपने काम न करने को लेकर नाराज़गी ज़ाहिर करते रहे. बीजेपी ने स्थिति पर क़रीबी नज़र बनाए रखी.

Monday, January 14, 2019

कैसे रखें दीपिका पादुकोण का ख्याल? शाहिद कपूर ने रणवीर सिंह को दी ये सलाह

हार्दिक पांड्या और केएल राहुल विवाद के बाद शाहिद कपूर और ईशान खट्टर ने कॉफी विद करण के सीज़न 6 में एंट्री की. शो में शाहिद और ईशान ने जमकर मस्ती की. रैपिड फायर राउंड में शाहिद ने सभी सवालों के मज़ेदार जवाब दिए और वे हैंपर जीतने में कामयाब रहे. इस दौरान करण जौहर ने शाहिद से यह  भी पूछा कि वे रणवीर सिंह को शादी के लिए क्या सलाह देना चाहेंगे?

शाहिद ने पद्मावत का ट्विस्ट डालते हुए कहा,"रणवीर को दीपिका से उतना ही प्यार करना चाहिए जितना रावल रत्न सिंह ने पद्मावती से किया." पद्मावत में शाहिद कपूर ने दीपिका के अपोजिट रावल रत्न सिंह की भूमिका निभाई थी, जबकि रणवीर सिंह अलाउद्दीन खिलजी के किरदार में थे. वैसे इससे पहले शाहिद ने प्रियंका चोपड़ा के पति निक जोनस के लिए भी सलाह डे चुके हैं. उन्होंने निक के लिए कहा था कि कभी हार मत मानना दोस्त, आप ओरिजिनल देसी गर्ल के साथ हैं.

वैसे शो में शाहिद से जब दीपिका और रणवीर के साथ संबंधों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, "मेरा इंडस्ट्री के ज्यादातर लोगों के साथ प्रोफेशनल रिश्ता ही रहा है. दीपिका, रणवीर और संजय भंसाली सर कभी मेरे फ्रेंड सर्कल का हिस्सा नहीं रहे. मेरा, दीपिका और रणवीर के साथ प्रोफेशनल रिश्ता रहा है और मुझे नहीं लगता कि ये किसी भी तरीके से बदला है. जब हम काम करते हैं तो हम आपस में कनेक्ट करते हैं और जब काम खत्म हो जाता है तो कनेक्शन भी खत्म हो जाता है."

दीपिका, रणवीर और शाहिद कपूर स्टारर फिल्म पद्मावत 2018 की सबसे सफल फिल्मों में शुमार है. इसके बाद उनकी फिल्म 'बत्ती गुल मीटर चालू' को दर्शकों की मिश्रित प्रतिक्रिया मिली थी. शाहिद आजकल तेलुगू फिल्म अर्जुन रेड्डी के रीमेक की वजह से सुर्खियों में हैं. फिल्म का नाम कबीर सिंह होगा और इसमें कियारा आडवाणी, शाहिद के अपोज़िट हैं.

वहीं, 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने रायबरेली से सोनिया गांधी के सामने अजय अग्रवाल को मैदान में उतारा था. मोदी लहर के बावजूद वो सोनिया के सामने कड़ी चुनौती पेश नहीं कर सके थे. लेकिन बीजेपी को करीब पौने दो लाख वोट मिले थे. इसके बाद जब 2017 में विधानसभा चुनाव हुए तो बीजेपी को 2, कांग्रेस को 2 और एक सीट पर सपा को जीत मिली थी.

हालांकि कांग्रेस के एमएलसी दिनेश सिंह और जिला पंचायत अध्यक्ष अवधेश सिंह ने पार्टी को छोड़कर बीजेपी का दामन थाम लिया है. इसके अलावा हरचंद्रपुर से कांग्रेस विधायक राकेश सिंह भले ही बीजेपी ज्वॉइन नहीं किया हो, लेकिन वो कांग्रेस के साथ भी नहीं खड़े दिख रहे हैं. 

बीजेपी ने 2019 में रायबरेली और अमेठी की घेराबंदी करने का प्लान बना रखा है.  बीजेपी नेता स्मृति ईरानी पिछले पांच साल से अमेठी में सक्रिय हैं. वो लगातार अमेठी का दौरा कर रही हैं और स्थानीय मुद्दों को उठाकर कांग्रेस आलाकमान को घेरती रहती हैं. इसी रणनीति के तहत बीजेपी ने सोनिया गांधी की संसदीय सीट से एमएलसी दिनेश प्रताप सिंह को अपने साथ मिला लिया है. इन दिनों दिनेश सिंह कांग्रेस नेतृत्व को घेरने का काम कर रहे हैं.

Monday, January 7, 2019

Redmi 6A की सेल आज, इस कीमत का बेस्ट स्मार्टफोन

शाओमी का बजट स्मार्टफोन Redmi 6A आज फ्लैश सेल में मिलेगा. इसे ऐमेजॉन और कंपनी की ऑफिशियल वेबसाइट Mi.com से खरीद सकते हैं. फ्लैश सेल की शुरुआत दोपहर 12 बजे से शुरू होगी और स्टॉक रहने तक इसे आप खरीद पाएंगे.

कीमत की बात करें तो 16GB मॉडल आप 5,999 रुपये में खरीद सकते हैं. जबकि 2GB रैम और 32GB इंटरनल मोमरी वाला वेरिएंट ओपन सेल में ही मिलता है.  सेल के दौरान 2GB रैम और 16GB मेमोरी वेरिएंट ही मिलेगा. माइक्रो एसडी कार्ड के जरिए इसकी मेमोरी बढ़ा सकते हैं.

आपको बता दें कि मार्केट में अभी सबसे सस्ते स्मार्टफोन्स में से ये बेस्ट है. इस कीमत पर कंपनी ने काफी बेहतरीन फीचर्स दिए हैं और ये फोन देखने में मिड रेंज स्मार्टफोन जैसा ही लगता है. इस फोन के साथ यूजर्स को नो कॉस्ट ईएमआई ऑप्शन भी दिया जाएगा. इतना ही नहीं है एडिशन ऑफर के तहत इस पर 2,000 रुपये का कैशबैक भी दिया जा सकता है. साथ ही इसके साथ जियो यूजर्स को 100GB तक एडिशन डेटा दिया जाएगा.

स्पेसिफिकेशन की बात करें तो इस स्मार्टफोन में 5.45 इंच की फुल एचडी प्लस डिस्प्ले है जिसका ऐस्पेक्ट रेश्यो 18:9 है. इसमें एंड्रॉयड 8.0 ओरियो बेस्ड कंपनी MIUI ओएस दिया गया है. इस स्मार्टफोन में मीडियाटेक Helio A22 प्रोसेसर दिया गया है जो क्वॉड कोर है.

फोटॉग्रफी के लिए इसमें 13 मेगापिक्सल का रियर कैमरा दिया गया है, जबकि सेल्फी के लिए इसमें 5 मेगापिक्सल फ्रंट कैमरा दिया गया है. रियर कैमरे में इलेक्ट्रॉनिक इमेज स्टेब्लाइजेशन का सपोर्ट है और और फ्रंट कैमरे से फेस अनलॉक का भी काम होता है.

कनेक्टिविटी के लिए Redmi 6A में 4G VoLTE सहित वाईफाई ब्लूटूथ, जीपीएस, माइक्रो यूएसबी सपोर्ट और 3.5mm जैक दिया गया है. स्मार्टफोन डुअल सिम हैं और दोनों ही स्लॉट 4G केपेबल हैं यानी दोनों में ही आप 4G सिम यूज कर सकते हैं. यह स्मार्टफोन तीन कलर वेरिएंट्स – गोल्ड, ब्लू और ब्लैक में उपलब्ध होगा.

खुफिया सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक 9 दिसंबर को गाज़ी अपने दो आतंकी साथियों के साथ कश्मीर में दाखिल होने में कामयाब हो गया है. माना जा रहा है कि वो कश्मीर के पुलवामा तक पहुंच चुका है. और उसे पहली जिम्मेदारी अल कायदा की तर्ज पर कश्मीर में नए आतंकियों की भर्ती करने की दी गई है. बताया जा रहा है कि गाज़ी अफगानिस्तान में अमेरिका और नॉटो फोर्स के खिलाफ लड़ता रहा है.

हाल के दिनों में कश्मीर घाटी से जिन भी युवाओं ने आतंक का रास्ता अपनाया. वो छह महीने से ज्यादा वक्त तक सक्रिय नहीं रह पाए. सुरक्षाबलों के ऑपरेशन में नए आतंकी जल्दी निशाने पर आते हैं. पहले के मुक़ाबले अब इन आतंकियों की ट्रेनिंग न के बराबर होती है. आतंकियों में ट्रेनिंग की कमी के चलते पाकिस्तान में आतंक के आकाओं को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है.

जानकारों की मानें तो अफ़ग़ानिस्तान में आतंकी गतिविधियों को अंजाम दे रहे ट्रेंड आतंकियों की घुसपैठ आने वाले दिनों में बढ़ सकती है. और अमेरिका के अफ़ग़ानिस्तान से अपनी पूरी फौज को वापस बुलाने के फैसले से भारत में आतंकी घटनाएं बढ़ सकती हैं. पैसों का लालच देकर पाकिस्तान और वहां कि आतंकी तंज़ीमें इन्हें भारत के खिलाफ फिर से इस्तेमाल कर सकती हैं. जैसा की 90 के दशक में हुआ था. सूत्रों की मानें तो फ़िलहाल जम्मू कश्मीर में इस वक़्त 120 से ज़्यादा विदेशी आतंकी मौजूद हैं. जो कभी भी भारत की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं.